ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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गाजियाबाद की “लाइफलाइन” रोड पर बड़ी तैयारी
गाजियाबाद में हापुड़ चुंगी से डासना तक का रास्ता उन सड़कों में आता है जहां दिनभर ट्रैफिक का दबाव बना रहता है। यही रोड दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और NH-9 को जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाती है, इसलिए यहां रोजाना हजारों वाहन चलते हैं। अब इसी रूट को सिग्नल-फ्री बनाने की तैयारी शुरू हो गई है, ताकि लोगों को बार-बार रेडलाइट पर रुकना न पड़े और जाम की परेशानी कम हो।
क्यों जरूरी था सिग्नल-फ्री प्लान?
इस रूट पर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर कई ट्रैफिक सिग्नल हैं। पीक टाइम में अक्सर यही रेडलाइट सबसे बड़ी रुकावट बन जाती है और लोगों को 10 से 15 मिनट सिर्फ सिग्नल पार करने में लग जाते हैं। कई बार जाम इतना बढ़ जाता है कि एम्बुलेंस जैसी जरूरी सेवाएं भी फंस जाती हैं, जिससे मरीजों और उनके परिवारों की चिंता और बढ़ जाती है।
अगले हफ्ते से सर्वे, फिर बनेगा पूरा रोडमैप
योजना को जमीन पर उतारने के लिए अगले हफ्ते से एक खास सर्वे शुरू होने जा रहा है। इस सर्वे में देखा जाएगा कि किन जगहों से ट्रैफिक लाइट हटाई जा सकती है, कहां “स्मार्ट यू-टर्न” बनाना सबसे सुरक्षित रहेगा और कहां डिवाइडर के पुराने कट बंद करने की जरूरत है। यह सर्वे एक बाहरी एजेंसी कराएगी, जो भारी वाहनों की आवाजाही को भी ध्यान में रखकर रिपोर्ट देगी।
“स्मार्ट यू-टर्न” क्या बदलेंगे?
सिग्नल हटाने का मतलब यह नहीं कि मोड़ने वाले वाहनों को परेशानी होगी। प्लान यह है कि डिवाइडर के बेवजह कट बंद करके कुछ दूरी पर सही जगह “स्मार्ट यू-टर्न” बनाए जाएं। इससे सीधे जाने वाले वाहन बिना रुके आगे निकलेंगे और जिन्हें मुड़ना है, वे तय जगह से सुरक्षित तरीके से यू-टर्न लेकर अपनी दिशा बदल सकेंगे।
इन 4 हॉटस्पॉट पर जाम सबसे ज्यादा—यहीं मिलेगा बड़ा फायदा
शहर में कुछ पॉइंट ऐसे हैं जहां रोज गाड़ियां रेंगती नजर आती हैं। योजना में खासतौर पर इन जगहों पर फोकस किया जा रहा है ताकि लोगों को तुरंत राहत दिखे।
आम लोगों को क्या फायदा होगा?
अगर यह रोड सच में सिग्नल-फ्री हो जाती है, तो सबसे बड़ा फायदा समय की बचत के रूप में दिखेगा। रोज ऑफिस जाने वाले, स्कूल बस, डिलीवरी वाले और छोटे कारोबारियों की आवाजाही आसान हो सकती है, क्योंकि बार-बार रुकने से फ्यूल भी ज्यादा खर्च होता है और गाड़ी की स्पीड भी टूटती है। सबसे जरूरी बात—एम्बुलेंस और इमरजेंसी वाहनों को तेज और साफ रास्ता मिलना, जो कई बार जीवन और समय का बड़ा फर्क बन जाता है।
प्लान के पीछे पहल किसकी रही?
इस समस्या को लेकर स्थानीय स्तर पर आवाज उठी थी और इसे प्राधिकरण के सामने रखा गया था। इसके बाद अब इसे एक ठोस योजना के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत सर्वे से होगी। यानी फिलहाल यह पहला कदम है—रिपोर्ट आएगी, फिर उसी के आधार पर डिजाइन और बदलाव तय होंगे।
आगे क्या—कब तक दिखेगा बदलाव?
अभी रोड को सिग्नल-फ्री बनाने के लिए सर्वे शुरू होना है और उसी के बाद अगला एक्शन प्लान बनेगा। लोगों की उम्मीद यही रहेगी कि जिन जगहों पर रोजाना जाम लगता है, वहां सबसे पहले सुधार दिखे। अगर “स्मार्ट यू-टर्न” सही जगह और सही डिजाइन के साथ बने, तो इस पूरे रूट पर ट्रैफिक का बहाव ज्यादा स्मूद हो सकता है और गाजियाबाद वालों को रोज की झुंझलाहट से राहत मिल सकती है।
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