गाजियाबाद के साहिबाबाद थाना क्षेत्र में एक बड़ा प्रॉपर्टी फ्रॉड सामने आया है, जिसमें एक कारोबारी को 60 लाख रुपये का नुकसान हुआ। आरोपी प्रॉपर्टी डीलर ने फर्जी प्लॉट दस्तावेज़ दिखाकर प्लॉट बेचने का भरोसा दिलाया और बड़ी रकम ऐंठ ली। पुलिस ने आरोपी पप्पू राघव उर्फ हरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
यह मामला तब उजागर हुआ जब पीड़ित कारोबारी सुशील गुप्ता ने 19 नवंबर 2025 को धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि आरोपी ने उन्हें आगरा के दो प्लॉटों के सबूत दिखाए और कहा कि ये उनके नाम से हैं। फिर उसने उन्हें सस्ते दाम में खरीदने का झांसा दिया और पैसे ले लिए। जब पैसे देने के बाद प्लॉट या दस्तावेज़ मांगे गए, तो आरोपी टालमटोल करने लगा।
फर्जी कागजात की छलावट
जब पीड़ित ने आगरा विकास प्राधिकरण कार्यालय जाकर जांच कराई, तब पता चला कि प्लॉट के दस्तावेज़ पुराने या फर्जी थे और प्राधिकरण के रिकॉर्ड में ऐसे नाम या रिकॉर्ड मौजूद ही नहीं हैं। यह बात स्पष्ट कर देती है कि धोखाधड़ी बड़ा स्कैम है, जिसमें पूरी योजना के साथ फर्जी कागजात तैयार किए गए थे।
आरोपी ने न केवल फर्जी प्लॉट होने का दावा किया, बल्कि यह भी कहा कि दोनों प्लॉट महंगे दाम पर बिकवाए जा सकते हैं, जिससे कारोबारी को भारी मुनाफा होगा। यह लालच वह सुशील को दिया और 60 लाख का भुगतान करा लिया। जब पैसे ले लिए गए, तब ही आरोपी ने रकम लौटाने या दस्तावेज़ देने से इनकार करना शुरू कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तार
पीड़ित की शिकायत पर साहिबाबाद पुलिस ने 28 जनवरी, 2026 को आरोपी पप्पू राघव उर्फ हरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। अभियुक्त से पूछताछ में उसने यह बात स्वीकार की कि उसने फर्जी दस्तावेज़ बनवाकर राशि ली थी। पुलिस ने दस्तावेजों और मोबाइल पर मौजूद सबूतों को कब्जे में लिया है और आगे की जांच जारी रखी है। आरोपी को कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया गया है।
एसीपी साहिबाबाद श्वेता यादव ने बताया कि ऐसे मामलों में पुलिस हर शिकायतों का गंभीरता से विश्लेषण करती है और दोषियों को कानून के तहत सख्त सज़ा दिलाने के प्रयास कर रही है।
पीड़ित का दर्द और आर्थिक नुकसान
इस तरह के फ्रॉड में न केवल 60 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि पीड़ित का मानसिक तनाव और फ्यूचर प्लानिंग भी प्रभावित होता है। सुशील जैसे कई लोग जमीनों या प्लॉटों को निवेश, घर बनाने या व्यवसाय के लिए खरीदते हैं। जब धोखाधड़ी होती है, तो वे न केवल पैसा खो देते हैं, बल्कि भविष्य की योजना भी बिगड़ जाती है।
जमीन फ्रॉड की सामान्य वजहें
इस तरह के फ्रॉड आमतौर पर तब होते हैं जब:
• फर्जी दस्तावेज़ तैयार करके किसी के नाम से मिट्ट़ी या जमीन को बेचने का दावा किया जाता है।
• डीलर यह कहता है कि प्लॉट उनके पास है, लेकिन असल में उस जमीन पर प्राधिकरण या वास्तविक मालिक के रिकॉर्ड नहीं होते।
• खरीदार बिना जांच किए दस्तावेज़ों को सच्चा मान लेता है और बड़ी रकम दे देता है।
गाजियाबाद जैसे बड़े इलाकों में संपत्ति के दाम ऊँचे हैं, इसलिए ऐसे मामले भी बढ़ते हैं। इस धोखाधड़ी में फर्जी NOC (No Objection Certificate), नक़ली नक्शे या पहले से रजिस्टर्ड दस्तावेज़ों की नकल जैसे तरीके दिखाए जाते हैं।
फर्जी दस्तावेज़ कैसे पहचाने?
खरीदारों को सबसे पहले यह ध्यान देना चाहिए कि जमीन खरीदते समय:
1. प्लॉट की असली रसीदें और टाइटल डीड रजिस्ट्री कार्यालय में जांचें।
2. स्थानीय सरकारी प्राधिकरण से यह कन्फर्म करें कि जमीन का मालिकाना हक कौन रखता है।
3. अगर संभव हो, तो किसी आईटीसी/लेकाटर या रियल एस्टेट वकील से सलाह लें।
ऐसे कई केस सामने आए हैं जहां फर्जी दस्तावेज़ पेश कर लोग करोड़ों का फ्रॉड रचते हैं, और पुलिस को बाद में लंबी जांच करनी पड़ती है।
सावधानियाँ और सुरक्षा टिप्स
इस तरह के मामलों से बचने के लिए खरीदारों को कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए:
• प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड स्वयं चेक करें, न कि सिर्फ डीलर के दस्तावेज़ों पर भरोसा करें।
• नाम परिवर्तन, रिकॉर्ड और पुराने मालिकाना रिकॉर्ड को भी भरपूर जाँचना चाहिए।
• पहले ही भुगतान के नियम और रसीदें लिखित में लें।
अगर कोई दिखावा करता है कि वह आपके लिए ऊँचे मुनाफ़े वाला डील प्रदान करेगा, तो धैर्य से जांच करना ज़रूरी है। ऐसे धोखे अक्सर लालच का फायदा ले कर किए जाते हैं।
कानूनी धाराएँ और सज़ा
धोखाधड़ी जैसे मामलों में भारतीय दंड संहिता की कई धाराएँ लागू हो सकती हैं — जैसे धोखाधड़ी (IPC Section 420), विश्वासघात (IPC Section 406) और फर्जी दस्तावेज़ के इस्तेमाल से जुड़े कई अनुभाग। यदि अदालत दोषी पाये, तो उसे भारी जुर्माना और जेल सज़ा भी हो सकती है।
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