ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मृतका के दोबारा पोस्टमार्टम की मांग को खारिज कर दिया है। यह मांग परिवार की ओर से उठाई गई थी, जो मामले की जांच को लेकर सवाल उठा रहा था।
शव को सुरक्षित रखने पर कोर्ट का आदेश
हालांकि, कोर्ट ने शव को लेकर एक अहम निर्देश जारी किया है। अदालत ने पुलिस को आदेश दिया है कि मध्य प्रदेश में सबसे बेहतर और आधुनिक लो-टेंपरेचर (डीप फ्रीजर) सुविधा की पहचान की जाए, जहां शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके। कोर्ट ने यह भी कहा कि शव को सुरक्षित रखने के लिए उचित और वैज्ञानिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि किसी तरह का नुकसान न हो।
पुलिस को भेजा गया आधिकारिक पत्र
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित थाना प्रभारी (SHO) को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया है। इसमें पुलिस से यह जानकारी मांगी गई है कि शव को सुरक्षित रखने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान कौन-सा होगा। पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद ही शव को वहां स्थानांतरित करने का निर्णय लिया जाएगा।
परिवार का दोबारा पोस्टमार्टम से इनकार
दूसरी ओर, पीड़िता का परिवार अभी भी दोबारा पोस्टमार्टम की मांग पर अड़ा हुआ है। परिवार का कहना है कि जब तक दोबारा पोस्टमार्टम नहीं किया जाएगा, वे शव को स्वीकार नहीं करेंगे। पुलिस ने परिवार से शव जल्द लेने की अपील की है, क्योंकि लंबे समय तक शव को रखने से उसके खराब होने का खतरा बढ़ सकता है।
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
मृतका के पिता नवनीधि शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी के साथ लंबे समय से मारपीट और प्रताड़ना की जा रही थी। परिवार ने जांच में लापरवाही के भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि FIR तीन दिन बाद दर्ज की गई, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि पहले पोस्टमार्टम के दौरान वह सामग्री पेश नहीं की गई, जिससे कथित तौर पर मौत हुई थी। इससे पूरे मामले की जांच पर संदेह और गहरा गया है। भोपाल का ट्विशा शर्मा मामला अब कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तर पर संवेदनशील बन गया है। एक तरफ कोर्ट ने दोबारा पोस्टमार्टम से इनकार किया है, वहीं शव संरक्षण को लेकर विशेष व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। आने वाले दिनों में पुलिस रिपोर्ट और आगे की जांच इस मामले की दिशा तय करेगी।
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