ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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एयर इंडिया ने बढ़ती परिचालन लागत और अंतरराष्ट्रीय एयरस्पेस प्रतिबंधों के बीच बड़ा फैसला लेते हुए करीब 100 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती करने की घोषणा की है। इसके साथ ही एयरलाइन ने सात अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने का भी फैसला किया है। कंपनी ने बताया कि यह बदलाव जून से अगस्त 2026 तक लागू रहेंगे। एयर इंडिया के अनुसार इस फैसले से उसकी अंतरराष्ट्रीय उड़ान क्षमता में लगभग 27 प्रतिशत तक कमी आएगी।
इन रूट्स पर अगस्त तक बंद रहेंगी उड़ानें
एयर इंडिया ने जिन रूट्स पर सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया है, उनमें दिल्ली से शिकागो, दिल्ली से नेवार्क, मुंबई से न्यूयॉर्क सिटी, दिल्ली से शंघाई, चेन्नई से सिंगापुर, मुंबई से ढाका और दिल्ली से माले की उड़ानें शामिल हैं। एयरलाइन ने कहा कि अगस्त 2026 तक इन रूट्स पर उड़ानें संचालित नहीं की जाएंगी।
पश्चिम एशिया तनाव और एयरस्पेस प्रतिबंध बड़ी वजह
कंपनी ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कई देशों के एयरस्पेस पर लगे प्रतिबंध इस फैसले की बड़ी वजह हैं। एयर इंडिया के अनुसार कई उड़ानों को अब लंबा रूट लेना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत काफी बढ़ गई है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जेट फ्यूल की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं। एयरलाइन का कहना है कि मौजूदा हालात में कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को व्यावसायिक रूप से जारी रखना मुश्किल हो गया है।
कई शहरों के लिए उड़ानों की संख्या भी घटेगी
एयर इंडिया ने यह भी कहा कि कुछ रूट्स पर सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं होंगी, लेकिन उड़ानों की संख्या कम कर दी जाएगी। जून से अगस्त के बीच दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को, टोरंटो, वैंकूवर, पेरिस, कोपेनहेगन, मिलान, वियना, ज्यूरिख और रोम के लिए उड़ानों की संख्या घटाई जाएगी। इसके अलावा मेलबर्न, सिडनी, सिंगापुर, बैंकॉक, कुआलालंपुर, हो ची मिन्ह सिटी, हनोई, काठमांडू, ढाका और कोलंबो के लिए भी कम उड़ानें संचालित होंगी।
मुंबई से सिंगापुर, बैंकॉक और कोलंबो जाने वाली उड़ानों में भी कटौती की जाएगी। हालांकि एयर इंडिया ने मुंबई से नेवार्क रूट पर उड़ानों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है।
आगे भी हो सकते हैं बदलाव
एयरलाइन ने संकेत दिए हैं कि यदि मौजूदा हालात बने रहते हैं तो आने वाले समय में नेटवर्क में और बदलाव किए जा सकते हैं। कंपनी लगातार वैश्विक परिस्थितियों और परिचालन लागत की समीक्षा कर रही है।
कर्मचारियों पर भी असर
एयर इंडिया के CEO और MD कैंपबेल विल्सन पहले ही कर्मचारियों को चेतावनी दे चुके हैं कि एयरलाइन कठिन दौर से गुजर रही है। उन्होंने बढ़ती ईंधन कीमतों, पाकिस्तान एयरस्पेस बंद होने और ईरान युद्ध जैसी परिस्थितियों को इसकी प्रमुख वजह बताया था। इसी कारण कंपनी ने कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने, गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने और लागत कम करने के लिए कई अन्य कदम उठाए हैं। एयरलाइन का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में परिचालन को संतुलित रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ानों में इस कटौती का असर यात्रियों पर भी पड़ेगा। कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर टिकट महंगे हो सकते हैं और यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानों का सहारा लेना पड़ सकता है। खासकर छात्रों, बिजनेस यात्रियों और विदेश यात्रा करने वाले लोगों को इससे परेशानी हो सकती है। एयर इंडिया का यह फैसला दिखाता है कि वैश्विक तनाव और बढ़ती ईंधन कीमतों का असर अब एविएशन सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
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