ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने और एक साल तक सोना न खरीदने की अपील के बाद अब देश में ऊर्जा संकट और तेल आयात को लेकर सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के एक बयान के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला बोल दिया है। खासकर शिवसेना (यूबीटी) नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने दस्तावेजों के जरिए सरकार के दावे पर सवाल उठाए हैं।
क्या कहा था हरदीप पुरी ने?
सीआईआई एनुअल बिजनेस समिट 2026 के दौरान हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत ने कभी रूस से एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस का आयात नहीं किया। उनका यह बयान उन खबरों के बाद आया, जिनमें दावा किया गया था कि भारत ने रूस से एलएनजी खरीदने से इनकार कर दिया है। पुरी ने यह भी कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय तेल कंपनियों पर भारी दबाव बना हुआ है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने दिखाए पुराने दस्तावेज
हरदीप पुरी के बयान के बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जवाब देते हुए कहा कि सरकार खुद संसद में रूस से एलएनजी आयात की बात स्वीकार कर चुकी है। उन्होंने दावा किया कि 2022 में संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मंत्रालय ने माना था कि भारत ने रूस से एलएनजी आयात किया था, भले ही उसकी मात्रा कम रही हो। प्रियंका ने कहा कि अब अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते के कारण भारत अपने ऊर्जा संबंधी फैसलों में स्वतंत्रता खो रहा है।
“भारत का संप्रभु अधिकार छीना जा रहा”
शिवसेना नेता ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की वजह से भारत के ऊर्जा फैसलों पर असर पड़ रहा है।उन्होंने लिखा, “ऊर्जा जरूरतों को लेकर भारत का संप्रभु निर्णय लेने का अधिकार छीना जा रहा है। इतिहास इसे याद रखेगा।” प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि अब सरकार लोगों में घबराहट फैलाने वाले बयान दे रही है।
तेल कंपनियों को हर दिन 1000 करोड़ का नुकसान
कार्यक्रम के दौरान हरदीप पुरी ने कहा कि मौजूदा हालात में सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन करीब 1000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। अगर यही स्थिति जारी रही तो एक तिमाही में कुल नुकसान करीब 1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जिससे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों पर भारी दबाव बढ़ गया है।
1.2 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है नुकसान
इंडस्ट्री अनुमानों के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों को वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में करीब 1.2 लाख करोड़ रुपए तक का नुकसान हो सकता है। पहले यह अनुमान लगभग 81 हजार करोड़ रुपए का था, लेकिन अब कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण स्थिति और गंभीर मानी जा रही है।
सरकार ने बढ़ाया LPG उत्पादन
ऊर्जा संकट और सप्लाई की चिंता के बीच हरदीप पुरी ने भरोसा दिलाया कि देश में फिलहाल पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत के पास करीब 60 दिनों के लिए कच्चे तेल और एलएनजी का स्टॉक उपलब्ध है, जबकि एलपीजी का भंडार लगभग 45 दिनों के लिए पर्याप्त है। मंत्री ने बताया कि सरकार ने एलपीजी उत्पादन भी बढ़ा दिया है। पहले जहां रोजाना 35 से 36 हजार टन उत्पादन होता था, उसे बढ़ाकर अब करीब 54 हजार टन कर दिया गया है।
बढ़ती कीमतों से बढ़ी चिंता
अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक सप्लाई संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है। यही वजह है कि अब ऊर्जा सुरक्षा, तेल आयात और सरकारी नीतियों को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। आने वाले समय में यह मुद्दा सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक विषय भी बन सकता है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!