ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET 2026 एक बार फिर पेपर लीक विवाद में घिर गई है। दावा किया जा रहा है कि NEET 2026 का पेपर परीक्षा से दो दिन पहले यानी 1 मई की रात टेलीग्राम ग्रुप पर शेयर कर दिया गया था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वायरल हुए कथित पेपर और असली परीक्षा के कई सवाल हूबहू मैच कर रहे हैं। इस मामले ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस पूरे मामले की जांच Central Bureau of Investigation यानी CBI कर रही है।
टेलीग्राम ग्रुप पर डाला गया था पेपर
जानकारी के मुताबिक “प्राइवेट माफिया” नाम के एक टेलीग्राम ग्रुप में 1 मई की रात करीब 11:30 बजे एक PDF फाइल अपलोड की गई थी। इस ग्रुप में करीब 402 सदस्य जुड़े हुए थे। ग्रुप एडमिन ने पेपर अपलोड करने से पहले मैसेज लिखा था कि जल्द ही पूरा पेपर अपलोड किया जाएगा। साथ ही PDF खोलने के लिए पासवर्ड भी शेयर किया गया था।
कुछ मिनट बाद ही सेट नंबर-12 वाला कथित पेपर ग्रुप में डाल दिया गया। इसके बाद दूसरा मैसेज आया — “जो पेपर भेजा है उसे सॉल्व कर लो, 99.99 प्रतिशत चांस है कि यही पेपर आएगा।”
असली पेपर से सवाल मैच होने का दावा
रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरल PDF और 3 मई को हुई असली परीक्षा के सेट नंबर-12 में कई सवाल पूरी तरह मैच कर रहे हैं। फिजिक्स के सवाल नंबर-5 में वर्टिकली ऊपर फेंकी गई बॉल की वेलोसिटी और टाइम से जुड़ा सवाल बताया गया है, जो दोनों पेपर में एक जैसा है। इतना ही नहीं, सवाल के साथ बनी फिगर भी पूरी तरह मैच कर रही है।
इसके अलावा सवाल नंबर-23 और 24 भी कथित लीक पेपर और असली पेपर में समान बताए जा रहे हैं। एक सवाल में प्रिज्म ABC की फोटो और उसके ऑप्शन तक एक जैसे होने का दावा किया गया है।
10 लाख में हुआ था सौदा!
CBI की जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था। जांच एजेंसी ने अब तक नासिक, जयपुर और गुरुग्राम से कई आरोपियों को हिरासत में लिया है। जांच में सामने आया कि कथित तौर पर पेपर का सौदा 10 लाख रुपए में तय हुआ था। आरोप है कि छात्रों को यह भरोसा दिलाया गया था कि कम से कम 150 सवाल असली परीक्षा से मैच करेंगे।
CBI ने किन लोगों को पकड़ा?
CBI ने इस मामले में कई आरोपियों को हिरासत में लिया है, जिनमें शुभम खैरनार, मांगीलाल बीवाल, विकास बीवाल, दिनेश बीवाल और यश यादव शामिल हैं।CBI के मुताबिक शुभम खैरनार ने सबसे पहले टेलीग्राम के जरिए यश यादव को कथित लीक पेपर भेजा था। इसके बाद यह पेपर दूसरे लोगों तक पहुंचाया गया।जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों के फोन से PDF फाइल, वॉट्सऐप चैट और दूसरे डिजिटल सबूत भी मिले हैं।
छात्रों तक कैसे पहुंचा पेपर?
CBI की दलीलों के अनुसार आरोपियों ने छात्रों और उनके परिवारों से मोटी रकम लेकर पेपर उपलब्ध कराने का वादा किया था। आरोप है कि कुछ छात्रों को प्रिंटेड कॉपी देकर सवाल और उनके जवाब याद करवाए गए। इसके अलावा इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप के जरिए भी उम्मीदवारों की जानकारी जुटाई गई। CBI का कहना है कि यह सिर्फ एक छोटे स्तर का मामला नहीं, बल्कि देशभर में फैला बड़ा रैकेट हो सकता है।
सरकारी कर्मचारियों और प्रिंटिंग प्रेस की भूमिका की जांच
CBI अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट की पहुंच कहां तक थी। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि कहीं इसमें प्रिंटिंग प्रेस या सरकारी कर्मचारी भी शामिल तो नहीं थे। स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नीतू सिंह ने कोर्ट में कहा कि पूरे देश में लीक पेपर फैलाया गया था, इसलिए आरोपियों की कस्टडी जरूरी है।
छात्रों और अभिभावकों में गुस्सा
पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी है। कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने सालभर मेहनत की, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। सोशल मीडिया पर भी NEET परीक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोग दोबारा परीक्षा कराने की मांग कर रहे हैं।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहली बार नहीं है जब NEET परीक्षा विवादों में आई हो। इससे पहले भी पेपर लीक, गड़बड़ी और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ चुके हैं। अब देखना होगा कि CBI की जांच में आगे क्या खुलासे होते हैं और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है
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