ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को एक भड़काऊ भाषण मामले में नोटिस जारी किया है और उनसे अपना पक्ष अदालत में रखने को कहा है। अदालत ने फैसला सुनाया है कि 27 फरवरी 2026 को अगली सुनवाई होगी, जिसमें सभी पक्षों के वकील और जवाब दर्ज होंगे। यह मामला 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार से जुड़ा है, जब खरगे ने एक रैली में दिए अपने भाषण के कारण विवाद खड़ा हो गया था। आरोप है कि उन्होंने बयान देते समय कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थीं, जिससे समाज में नफरत फैलने की आशंका जताई गई थी।
आरंभ कब हुआ? — 2023 की रैली और शिकायत
मामला तब शुरू हुआ जब अप्रैल 2023 में कर्नाटक के नरेगल नाम के स्थान पर की गई एक चुनावी रैली में खरगे के भाषण को लेकर एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता रविंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि भाषण भड़काऊ था और इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और केंद्रीय नेताओं को लेकर नफरत फैलाने वाले शब्द थे।
गुप्ता ने यह भी कहा कि यह भाषण किसी समुदाय, धर्म या जाति को सीधे निशाना नहीं बनाता है, लेकिन फिर भी भड़काऊ भाषा के चलते इसका क़ानूनी हिसाब होना जरूरी है। उन्होंने अल्पसंख्यकों और संघ‑बोध का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे भाषण समाज में खराब माहौल पैदा करते हैं।
तीस हजारी कोर्ट का फैसला — पहले खारिज हुई याचिका
शिकायत के बाद 2024 के नवंबर में यह मामला दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में भी गया था। उस कोर्ट ने यह याचिका संज्ञा लेने से मना कर दी थी और इसे खारिज कर दिया था। कोर्ट का तर्क था कि भाषण का सीधा संबंध समुदाय‑विशेष या धार्मिक रूप से विरोध फैलाने जैसा कोई संकेत नहीं लगता है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही यह भाषण तीखा और विवादित रहा हो, लेकिन वह इसका *अपराधिक मामला नहीं मानती जब तक यह साबित नहीं किया जाता कि भाषण ने सीधे सामाजिक समूहों के बीच नफरत बढ़ाई है। दिसंबर 2024 में भी इसी कोर्ट ने FIR दर्ज करने के निर्देश नहीं दिए, जिससे शिकायतकर्ता बहुत असंतुष्ट रहा और उन्होंने उपर्युक्त सत्र न्यायालय में अपील (revision) दायर की।
अब राउज एवेन्यू कोर्ट ने नोटिस क्यों जारी किया?
शिकायतकर्ता की अपील पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और फैसला किया कि सभी पक्षों की सुनवाई जरूरी है। न्यायिक जज ने नोटिस जारी कर खरगे और दिल्ली पुलिस को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है ताकि यह तय किया जा सके कि क्या यह मामला वैध रूप से आपराधिक रूप से आगे बढ़ने योग्य है या नहीं।
न्यायालय ने न केवल खरगे को नोटिस भेजा है, बल्कि ट्रायल कोर्ट के सारे रिकॉर्ड को भी मांगा गया है, ताकि आगे दिए गए फैसले की न्यायिक समीक्षा सही ढंग से हो सके। खरगे के वकील और वादी‑ पक्ष दोनों को 27 फरवरी तक अपना पक्ष अदालत में प्रस्तुत करना है। अदालत के इस कदम का उद्देश्य सभी तथ्यों को खुलकर सामने लाना है और यह तय करना है कि क्या भड़काऊ भाषण का आरोप सच्चाई पर आधारित है या नहीं।
मॉरलिटी बनाम अभिव्यक्ति की आज़ादी
यह मामला एक ऐसे समय में आया है जब भारत में भाषण की स्वतंत्रता और भड़काऊ भाषण की सीमा पर बहस लगातार होती रही है। अदालतों का कहना है कि संविधान हमें वक्ता की स्वतंत्रता देता है, लेकिन यह आज़ादी अन्य लोगों के सम्मान, गरिमा और शांति को प्रभावित किए बिना होनी चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट जैसे शीर्ष न्यायालयों ने पहले ही स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक भाषणों पर लेबल लगाना आसान नहीं है, लेकिन अगर किसी टिप्पणी से नफरत, उपद्रव या व्यक्तिगत अपमान फैलता है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और प्रभाव
खरगे की पार्टी कांग्रेस और विपक्षी नेताओं ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। पार्टी का दावा है कि कई बार वरिष्ठ नेताओं को विरोध‑आलोचना के नाम पर निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा है कि भाषण राजनीतिक बहस का हिस्सा है और इसे नफरत फैलाने के रूप में पेश करना सही नहीं है।
दूसरी ओर शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि किसी भी बड़े नेता की बात यदि समुदायों के बीच नफरत बढ़ाने वाले स्वरूप में हो, तो उस पर कानूनी कार्रवाई होना ही चाहिए। यह मामला केवल एक व्यक्ति की प्रतिष्ठा का सवाल नहीं, बल्कि सामाजिक शांति को बनाए रखने का भी मुद्दा है।
क्या होगा अब? — अगले कदम
अब 27 फरवरी 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट में अगली सुनवाई होगी। अदालत दोनों पक्षों के तर्क सुनेगी – शिकायतकर्ता के वकील, दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट, और खरगे की दलीलें। अदालत फाइनल फैसला यह तय करेगी कि:
1. क्या भड़काऊ भाषण के आरोप पर केस आगे बढ़ेगा?
2. क्या FIR दर्ज होने योग्य है?
3. क्या बयान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत आता है या नफरत फैलाने वाला है?
ये सारे सवाल अब हल होने बाकी हैं। कोर्ट का यह कदम यह संकेत देता है कि कानून सभी के लिए बराबर लागू होता है, चाहे पार्टी कोई भी हो या नेता कितना भी बड़ा क्यों न हो।
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