दिल्ली में अरब देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक: भारत‑अरब संबंधों को नई दिशा
भारत की राजधानी नई दिल्ली में 31 जनवरी को भारत‑अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक का आयोजन किया गया है। यह बैठक पिछले लगभग दस साल में अरब देशों के साथ सबसे बड़ा कूटनीतिक मंच है। बैठक में सहयोग, व्यापार, ऊर्जा, गाजा पुनर्निर्माण जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी।
दिल्ली में अरब देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक: भारत‑अरब संबंधों को नई दिशा
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भारत की राजधानी नई दिल्ली में अरब देशों के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक 31 जनवरी 2026 को आयोजित की जा रही है। यह बैठक पिछले लगभग दस साल के अंतराल के बाद हो रही है और इसका उद्देश्य भारत और अरब देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक, ऊर्जा, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाना है। यह बैठक भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सह‑अध्यक्षता में हो रही है, जिसमें 22 अरब लीग सदस्य देशों के प्रतिनिधि, विदेश मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया है।

 

भारत‑अरब देशों के बीच यह दो‑तरफा संवाद प्लेटफॉर्म वर्षों से विकसित होता रहा है। इसकी शुरुआत मार्च 2002 में मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के जरिए हुई थी, जिसमें भारत और अरब लीग ऑफ स्टेट्स के बीच नियमित बातचीत को औपचारिक रूप दिया गया था।

 

बैठक का ऐतिहासिक महत्व

यह बैठक इसलिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि पिछले दशक में भारत‑अरब देशों के बीच कई मुद्दों पर सहयोग को बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की गई थी, लेकिन उच्च स्तर की बैठकें नियत अंतराल पर नहीं हो पाई थीं। पहली बैठक 2016 में बहरीन में आयोजित हुई थी, और उसके बाद अब तक इस स्तर की बैठक नई दिल्ली में आयोजित नहीं हुई थी।

 

इस बैठक में सभी अरब देशों के विदेश मंत्री शामिल होने वाले हैं, जो अपनी भागीदारी और विचारों के साथ भारत के साथ सहयोग को और गहरा बनाना चाहते हैं। इससे भारत के अंतरराष्ट्रीय राजनयिक रिश्तों में एक नया मोड़ आएगा और मध्य पूर्व के देशों के साथ शक्ति संतुलन तथा सहयोग के क्षेत्र मजबूत होंगे।

 

क्यों यह बैठक अहम है?

1. कूटनीतिक साझेदारी को मजबूती

भारत और अरब देशों के बीच आर्थिक, ऊर्जा, राजनीतिक और सांस्कृतिक साझेदारी वर्षों से मजबूत होती जा रही है। इस बैठक से यह साझेदारी और संस्थागत रूप से मज़बूत होने की उम्मीद है। भारत अरब लीग का पर्यवेक्षक भी है, जिससे दोनों पक्षों के बीच संवाद और सहयोग को एक औपचारिक प्लेटफॉर्म मिलता है।

 

2. व्यापार और ऊर्जा सहयोग

अरब देशों के साथ भारत का आर्थिक और व्यापारिक सहयोग काफी महत्वपूर्ण है। वन्य तेल, गैस और ऊर्जा संसाधनों में अरब देशों की भूमिका वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय है। भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा प्रायः अरब देशों से आता है, इसलिए व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर भी इस बैठक में विशेष ध्यान होगा। इससे दोनों क्षेत्रों के बीच निवेश और व्यापारिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के मार्ग खुलेंगे।

 

3. गाजा के पुनर्निर्माण में भूमिका

हाल ही में गाजा क्षेत्र की पुनर्निर्माण की बात भी महत्वपूर्ण रूप से उभरती हुई नजर आ रही है। कई अरब देशों के प्रतिनिधियों ने भारत से अपेक्षा जताई है कि वह गाजा के विनाश के बाद पुनर्निर्माण में सहयोग कर सकता है और शांति प्रक्रिया में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।

 

बैठक में कौन‑कौन शामिल हो रहे हैं?

भारत‑अरब विदेश मंत्रियों की इस बैठक में 22 अरब लीग सदस्य देशों के राजनयिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इनमें से कई देशों के विदेश मंत्री सीधे नई दिल्ली पहुंच चुके हैं या बैठक में शामिल होने के लिए अपनी तैयारियाँ पूरी कर रहे हैं।

 

उदाहरण के लिए, कोमोरोस के विदेश मंत्री, फिलिस्तीन की विदेश मंत्री और सूडान के विदेश मंत्री जैसे प्रमुख प्रतिनिधि इस बैठक में भाग ले रहे हैं। यह दर्शाता है कि बैठक में न केवल अर्थव्यवस्था बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा, मानवाधिकार और पुनर्निर्माण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।

 

पिछली बैठकों और भारत‑अरब रिश्तों की पृष्ठभूमि

भारत‑अरब देशों के बीच यह संवादी प्रक्रिया 2002 से जारी है, जब दोनों पक्षों ने मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किए थे और यह formal मंच आरंभ हुआ। पहली विदेश मंत्रियों की बैठक 2016 में बहरीन में आयोजित हुई थी। तब कई क्षेत्रों में सहयोग के पांच प्रमुख आयाम तय किए गए थे – अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति।

 

ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझा कार्यक्रम और गतिविधियों की रूपरेखा तैयार की गई, ताकि दोनों पक्षों के बीच सहयोग को ठोस योजनाओं में बदला जा सके। आज की बैठक इसी क्रम का दूसरा और विस्तारित चरण है, जिसमें उम्मीद है कि नए मुद्दों और साझेदारियों पर भी सहमति बनेगी।

 

भारत की भूमिका – क्यों यह पहल ज़रूरी है?

भारत, दुनिया की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में एक है और उसकी भू‑राजनीतिक भूमिका भी अधिक व्यापक होती जा रही है। अरब देशों के साथ सहयोग का मतलब सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर सामंजस्य, ऊर्जा सुरक्षा और साझा विकास की दिशा में कदम उठाना है। इसके साथ ही यह बैठक भारत की कूटनीतिक दिशा को भी मजबूत करती है – क्योंकि मध्य पूर्व और अरब दुनिया वैश्विक ऊर्जा, सुरक्षा और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। इस मंच से भारत को यह अवसर मिलता है कि वह एक संतुलित और भरोसेमंद भागीदार के रूप में अपनी पहचान बना सके।

 

संभावित फैसले और आगे की दिशा

इस बैठक को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि ठोस घोषणाएँ भी हो सकती हैं। इनमें व्यापार में नए समझौते, ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाना और विश्व समुदाय में शांति एवं सुरक्षा प्रयासों में संयुक्त पहल शामिल है। खासकर गाजा पुनर्निर्माण योजना और मध्य पूर्व में स्थिरता को लेकर भारत की भूमिका पर भी काफी चर्चा होने की संभावना है, क्योंकि कई देशों ने पहले से ही इस दिशा में अपेक्षा जताई है।

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