बजट 2026 में बड़ा ऐलान: ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ से भारत को तकनीकी ताकत मिलेगी
केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री ने ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ यानी दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के उत्पादन और प्रसंस्करण के लिए ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में विशेष गलियारे बनाने की घोषणा की है। इससे भारत की चीन पर निर्भरता कम होगी और तकनीकी विकास के नए अवसर बनेंगे।
बजट 2026 में बड़ा ऐलान: ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ से भारत को तकनीकी ताकत मिलेगी
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भारत में बजट 2026-27 पेश करते समय वित्त मंत्री ने देश के लिए एक बड़ी तकनीकी और आर्थिक घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सरकार ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों मेंरेयर अर्थ कॉरिडोरयानी दुर्लभ पृथ्वी तत्वों पर आधारित विशेष मार्ग विकसित करेगी। इस कदम का उद्देश्य न सिर्फ भारत को इन महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भर बनाना है बल्कि भविष्य की उभरती तकनीकों में देश की क्षमता को मजबूत करना भी है।

 

रेयर अर्थनामक तत्व ऐसे महत्वपूर्ण खनिजों को कहा जाता है जिनकी जरूरत आज की तकनीक-प्रधान दुनिया में बहुत अधिक है। स्मार्टफोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, रडार, सैटेलाइट और रक्षा-उपकरणों जैसे हाई-टेक सेक्टर में इन खनिजों का विस्तृत इस्तेमाल होता है।

 

रेयर अर्थ क्या हैं और क्यों ज़रूरी?

सबसे पहले यह जानना जरूरी है किरेयर अर्थ मिनरल्सवास्तव में क्या होते हैं। यह पृथ्वी पर मौजूद 17 ऐसे तत्वों का समूह है जिनका इस्तेमाल आज की आधुनिक तकनीकों में होता है, लेकिन इनका उत्पादन और शुद्धीकरण बेहद महंगा और जटिल होता है। उदाहरण के तौर पर, इलेक्ट्रिक वाहनों के मोटर और बैटरियों में, स्मार्टफोन जैसे उपकरणों में, और रक्षा-उद्योग के उच्च-प्रदर्शन मैग्नेट्स में इन तत्वों की मांग बहुत अधिक होती है।

 

दुर्लभ पृथ्वी कोदुर्लभइसलिए कहा जाता है क्योंकि इन तत्वों का उत्पादन तकनीकी रूप से कठिन है और इन्हें ढूँढना और प्रोसैसिंग करना आसान नहीं है। चीन आज दुनिया में इन खनिजों के उत्पादन और रिफाइनिंग के मामले में सबसे आगे है, और लगभग 90% वैश्विक आपूर्ति का नियंत्रण उसके पास है।

 

भारत जैसे देश के लिए यह स्थिति एक जोखिम भी है, क्योंकि तकनीकी उपकरणों और रक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण हिस्सों की आपूर्ति चीन पर निर्भर रहती है। यही कारण है कि सरकार ने इस बजट मेंरेयर अर्थ कॉरिडोरबनाने का कदम उठाया है।

 

कोरोिडोर योजना का उद्देश्य क्या है?

इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत की आत्मनिर्भरता (self-reliance) को बढ़ाना है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा है कि इन कॉरिडोरों से:

खनिजों का खनन, प्रसंस्करण और शुद्धीकरण आसान और सस्ता बनेगा।

सप्लाई चेन मजबूत होगी, यानी भारत तकनीकी उद्योगों के लिए आवश्यक सामग्री खुद उपलब्ध करा सकेगा।

देश की चीन पर निर्भरता कम होगी और वैश्विक बाजार में अपनी जगह मजबूत करेगा।

 

इस योजना के तहत ओडिशा के तटीय इलाकों, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के समुद्री रेत तथा अन्य खनिज भंडारों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वहां पर न सिर्फ खनन किया जाएगा, बल्कि रिसर्च, प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे चरणों को जोड़ा जाएगा, ताकि पूरे उत्पादन चक्र में भारत खुद सक्षम हो सके।

 

ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की भूमिका

भारत के इन तीन राज्यों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहां रेयर अर्थ तत्वों से भरपूर खनिज संसाधन पहले से उपलब्ध हैं। उदाहरण के तौर पर समुद्र तटों की रेत में मोनाज़ाइट, इल्मेनाइट, रूटाइल और ज़िरकॉन जैसे भारी खनिज पाए जाते हैं जिनमें रेयर अर्थ तत्व होते हैं।

 

ओडिशा को अक्सर खनिज संसाधनों और भारी उद्योग का केंद्र माना जाता रहा है। यहां के समुद्री इलाकों मेंरेयर अर्थके खनिजों का भंडार है, और कॉरिडोर योजना इसका पूरा फायदा उठाने में मदद करेगी। वहीं, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी समुद्री रेत से जुड़े खनिज पाए जाते हैं जिनका उपयोग तकनीकी उद्योगों में किया जा सकता है।

 

इन राज्यों में इस नई पहल से स्थानीय रोजगार के अवसर भी बन सकते हैं। खनन, प्रसंस्करण और विनिर्माण से जुड़ी गतिविधियों के लिए नई फैक्ट्रियों, रिसर्च सेंटरों और सप्लाई चेन-नेटवर्क की जरूरत होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

 

चीन की भूमिका और भारत की चुनौतियां

दुनिया में आज रेयर अर्थ की सप्लाई चेन पर चीन का वर्चस्व है। वैश्विक उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा वहीं से आता है, और इससे कई देशों की तकनीकी उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित होती है। यदि चीन अपनी निर्यात नियंत्रण नीतियों को बदलता है या आपूर्ति सीमित करता है, तो दुनिया भर में टेक इंडस्ट्री को संकट का सामना करना पड़ सकता है।

 

इसलिए भारत का उद्देश्य है कि वह इन खनिजों के मामले में आत्मनिर्भर बने, ताकि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव से राष्ट्रीय उत्पादन प्रभावित न हो।रेयर अर्थ कॉरिडोरइसी बात का एक बड़ा कदम है जो देश की सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और भविष्य की तकनीकी जरूरतों को पूरा करेगा।

 

आर्थिक और तकनीकी लाभ

इस योजना के कई फायदे हैं:

1. घरेलू उत्पादन क्षमता में वृद्धि: भारत के पास मौजूद खनिज संसाधन अब बेहतर तरीके से उपयोग किए जा सकते हैं।

2. तकनीकी उद्योग को समर्थन: इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण, ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत होगी।

3. रोजगार के अवसर: नए कॉरिडोर और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स से स्थानीय युवा रोजगार पा सकेंगे।

4. आत्मनिर्भरता में वृद्धि: तकनीकी उपकरणों और सामरिक मुकाबले में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।

 

सरकार की रणनीति और आगे की राह

सरकार ने केवल कॉरिडोर बनाने ही नहीं कहा है, बल्कि इसके लिए बजेट 2025 में पहले से स्वीकृत योजनाओं को और नई दिशा दी है। इसके तहत पहले से ही “Scheme to Promote Manufacturing of Sintered Rare Earth Permanent Magnet” के लिए कई अरब रुपए की मंजूरी दी जा चुकी है, ताकि भारत में व्यापक स्तर पर रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन हो सके।

 

इसके अलावा सरकार ने हाई-टेक टूल रूम्स और उपकरण निर्माण सुविधाओं का प्रस्ताव भी रखा है, जिससे उच्च तकनीक वाले घटकों का स्थानीय उत्पादन और परीक्षण संभव हो सके।


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