ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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हाल ही में महाराष्ट्र की राजनीतिक दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सुनेत्रा पवार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की वरिष्ठ नेता और अजित पवार की पत्नी, को महाराष्ट्र का उप मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया है। यह पद उन्होने राज्यसभा से इस्तीफा देकर ग्रहण किया, और यह ऐतिहासिक मौका है क्योंकि वे राज्य की पहली महिला उप मुख्यमंत्री बनीं हैं।
हालांकि इस पद की घोषणा के साथ ही राजनीति में सवाल और आलोचना भी तेज़ हो गई है, खासकर शिवसेना के मुखपत्र सामना की तरफ से आई प्रतिक्रिया ने सुनेत्रा पवार के निर्णय को ‘राजनीति’ की दृष्टि से देखने का आग्रह किया है।
‘सामना’ का संपादकीय क्यों पड़ा भारी?
‘सामना’ नामक शिवसेना का मुखपत्र महाराष्ट्र में हमेशा से ही राजनीतिक सियासत का प्रभावशाली हिस्सा रहा है। हाल ही में इस अखबार ने सुनेत्रा पवार के उप मुख्यमंत्री पद पर सूतक (शोक) के दौरान शपथ ग्रहण पर तीखी टिप्पणी की है। संपादकीय में कहा गया कि अजित पवार के देहांत के ठीक बाद, जबकि परिवार और समर्थक शोक के माहौल में थे, उस समय सुनेत्रा पवार का शपथ ग्रहण करना हिंदू परंपरा और रस्मों के खिलाफ और राजनीति की जल्दबाजी जैसा प्रतीत होता है।
सामना संपादकीय में यह भी सवाल उठाया गया कि क्या यह निर्णय राजनीतिक समझदारी से लिया गया या फिर किसी दबाव में ऐसा कदम उठाया गया? क्योंकि पार्टी और समर्थन समूह अभी तक शोक से बाहर भी नहीं आए थे, ऐसे में अचानक से बड़े राजनीतिक फैसले का होना कुछ लोगों को स्वीकार्य नहीं लगा।
सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण की पृष्ठभूमि
सुनेत्रा पवार का नाम महाराष्ट्र में राजनीति के केंद्र में तब आया जब उनके पति अजित पवार का निधन अचानक हो गया। इसके बाद राजनैतिक खामोशी और बेचैनी का माहौल राज्य में बन गया। इसी बीच NCP विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से सुनेत्रा पवार को नेता चुना गया और फिर उन्होंने उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
इस शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अन्य नेताओं की उपस्थिति रही। शपथ ग्रहण के बाद सुनेत्रा पवार ने अपने नए पद को बड़े सम्मान के साथ स्वीकार किया और कहा कि वह जनता की सेवा में पूरी निष्ठा से काम करेंगी।
पहली महिला उप मुख्यमंत्री: यह बड़ा इतिहास
सुनेत्रा पवार का उप मुख्यमंत्री बनना सिर्फ एक राजनीतिक बदलाव भर नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र में पहली महिला उप मुख्यमंत्री पद की परिणति भी है। यह ऐतिहासिक है क्योंकि राज्य में पहले कभी भी किसी महिला को इस पद पर नहीं देखा गया था।
उनके इस पद पर आने से न केवल पवार परिवार की राजनीतिक विरासत जारी रहने का संदेश मिलता है, बल्कि महिलाओं के लिए राजनीति में एक बड़ा उदाहरण भी बनता है। कई लोगों ने इस कदम को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा है और कहा है कि इसे महिलाओं के अधिकार और राजनीति में उनकी भागीदारी के लिए एक बड़ा कदम माना जा सकता है।
सियासी नज़रिया: समर्थन और विरोध दोनों
जहाँ कुछ लोग सुनेत्रा पवार के निर्णय का समर्थन कर रहे हैं, वहीं सामना की आलोचना के अलावा कुछ अन्य राजनीतिक समूहों ने भी इसमें आलोचनात्मक नजरिया अपनाया है। उनका मानना है कि इस तरह के निर्णय को परिवार और पार्टी रणनीति के साथ मिलकर बेहतर समय पर लेना चाहिए था, खासकर जब शोक की अवधि सुचक है और सामाजिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जाता है।
दूसरी तरफ, सुनेत्रा पवार के समर्थक कहते हैं कि राजनीति में निर्णय लेना समय की मांग होता है और पार्टी की मजबूती के लिए कदम जल्दी उठाए जाना ज़रूरी था। उनका कहना है कि पार्टी की स्थिरता और भविष्य की दिशा सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया, जिससे सरकार को स्थिर बनाए रखा जा सके।
पवार परिवार और राजनीति का भविष्य
सुनेत्रा पवार की नियुक्ति के बाद अब एक बड़ा सवाल यह है कि पवार परिवार की राजनीति आगे किस दिशा में जाएगी। सुनेत्रा की पहली प्राथमिकता संगठन को एकजुट रखना और अपने समर्थकों का विश्वास बनाए रखना है। इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि NCP के भीतर और गठबंधन सहयोगियों के बीच कैसे सामंजस्य बैठता है।
कुछ विश्लेषक यह भी मानते हैं कि पार्टी के विलय और संरचना को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं, और यह राजनीतिक राजनीति का एक बड़ा हिस्सा होगा।
गृह राजनीति और जनता की प्रतिक्रिया
सामना की आलोचनात्मक टिप्पणी के बावजूद जनता के बीच प्रतिक्रियाएं मिश्रित हैं। कुछ लोग इसे पारिवारिक राजनीति और सत्ता का खेल मानते हैं, वहीं कई लोग इसे महिलाओं के नेतृत्व का शक्तिशाली उदाहरण भी मानते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजनीति में निर्णय हमेशा दो तरफा प्रभाव छोड़ते हैं।
जहाँ एक तरफ सामना की टिप्पणी ने राजनीतिक हलचल बढ़ाई है और विपक्ष ने भी इसका समर्थन किया है, वहीं आम जनता की राय में कुछ लोगों ने कहा कि इससे राज्य और जनता को कोई बड़ा लाभ या हानि नहीं हुआ है। वे इसे एक राजनीतिक प्रक्रिया का भाग मानते हैं जिसे समय और परिणाम के आधार पर समझना चाहिए।
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