ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले का खोड़ा नगर पालिका क्षेत्र इन दिनों एक अलग वजह से चर्चा में है। यहां चल रही जनगणना प्रक्रिया कर्मचारियों के लिए किसी मुश्किल मिशन से कम साबित नहीं हो रही। घनी आबादी, संकरी गलियां और बिना व्यवस्थित एड्रेस सिस्टम के कारण कर्मचारियों को घर-घर पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करीब पांच लाख की आबादी वाले इस इलाके में न तो ज्यादातर मकानों पर साफ-साफ नंबर लिखे हैं और न ही गलियों के नाम ठीक से दर्ज हैं। ऐसे में जनगणना टीमों को सही पते तक पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। यही वजह है कि अब खोड़ा की गलियां सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई हैं।
बिना हाउस नंबर और गली नाम के बढ़ी दिक्कत
खोड़ा क्षेत्र लंबे समय से अव्यवस्थित शहरी बसावट के लिए जाना जाता है। यहां कई इलाकों में मकानों पर स्थायी नंबर प्लेट नहीं लगी हैं। वहीं गलियों के नाम भी स्पष्ट रूप से नहीं लिखे गए हैं। ऐसे में किसी बाहरी व्यक्ति के लिए किसी खास घर तक पहुंचना बेहद कठिन हो जाता है। जनगणना कर्मचारियों का कहना है कि कई बार एक ही गली में बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई रास्ते इतने एक जैसे दिखते हैं कि लोग आसानी से भ्रमित हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि अगर व्यवस्थित हाउस नंबरिंग और गली नंबरिंग होती, तो जनगणना का काम काफी आसान हो सकता था।
1040 कर्मचारियों पर बड़ी जिम्मेदारी
जनगणना अभियान के तहत खोड़ा में कुल 1040 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। ये कर्मचारी अलग-अलग वार्डों में जाकर परिवारों से जानकारी जुटा रहे हैं। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि कर्मचारियों का काफी समय सिर्फ सही घर ढूंढने में ही निकल रहा है। कई बार उन्हें स्थानीय लोगों से रास्ता पूछकर आगे बढ़ना पड़ता है। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि कई घरों तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। यदि एड्रेस सिस्टम व्यवस्थित होता तो जनगणना का काम तेजी से पूरा किया जा सकता था।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए मीम्स
खोड़ा की गलियों को लेकर सोशल मीडिया पर मजेदार मीम्स और कमेंट्स भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग इस अव्यवस्था पर मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “खोड़ा में किसी का घर ढूंढना ट्रेजर हंट खेलने जैसा है।” वहीं दूसरे यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “यहां जनगणना कर्मचारी के सामने GPS भी फेल हो जाएगा।”
इन मीम्स के जरिए लोग शहरी योजना और बुनियादी व्यवस्थाओं की कमी की ओर भी इशारा कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि तेजी से बढ़ती आबादी के बावजूद इलाके में सही ढंग से शहरी विकास नहीं हो पाया।
आधा काम पूरा, नगर पालिका ने दी सफाई
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सिंह के अनुसार खोड़ा में जनगणना का लगभग 50 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि पहले नगर पालिका की तरफ से हाउस नंबरिंग का काम कराया गया था और मकानों पर स्लिप भी लगाई गई थीं। लेकिन समय के साथ कई स्लिप्स हट गईं या बारिश और धूल की वजह से खराब हो गईं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को स्थानीय स्तर पर हर संभव सहयोग दिया जा रहा है ताकि जनगणना का कार्य समय पर पूरा हो सके।
शहरी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
खोड़ा की यह स्थिति एक बार फिर तेजी से बढ़ते शहरी इलाकों की अव्यवस्थित प्लानिंग पर सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सही एड्रेस सिस्टम, सड़क व्यवस्था और हाउस नंबरिंग पर ध्यान दिया जाए तो भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सकता है। फिलहाल जनगणना कर्मचारी चुनौतीपूर्ण हालात में अपना काम पूरा करने में जुटे हुए हैं, जबकि सोशल मीडिया पर खोड़ा की गलियां चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई हैं।
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