ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हिंदू युवा वाहिनी के नेता सुषिल प्रजापति की जमानत पर रिहाई के बाद हुए भव्य स्वागत को लेकर सियासत तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में समर्थक उन्हें फूल-मालाओं से लादते, कंधों पर बैठाकर जुलूस निकालते और नारे लगाते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि गाजियाबाद इकाई के प्रमुख सुषिल प्रजापति करीब आठ महीने जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आए हैं। उनकी रिहाई के बाद समर्थकों ने बड़े स्तर पर स्वागत समारोह आयोजित किया, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए।
ढोल-नगाड़ों के साथ निकाला गया जुलूस
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि सुषिल प्रजापति के समर्थन में ढोल-नगाड़े बजाए गए और सड़क पर जुलूस निकाला गया। समर्थक उन्हें फूलों की मालाएं पहनाते और कंधों पर बैठाकर आगे बढ़ते दिखाई दिए। यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। कई लोगों ने इस तरह के स्वागत पर सवाल उठाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, सुषिल प्रजापति को पिछले साल एक एलएलबी छात्रा की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उन्होंने छात्रा को एक वरिष्ठ वकील से मिलवाने का झांसा देकर फ्लैट पर बुलाया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। करीब आठ महीने जेल में रहने के बाद अब उन्हें जमानत मिली है।
वीडियो वायरल होने पर विपक्ष का हमला
रिहाई के बाद हुए स्वागत समारोह का वीडियो वायरल होने के बाद विपक्ष ने भाजपा सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। Akhilesh Yadav ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश में दुष्कर्म के आरोपियों का इस तरह स्वागत हो, वहां महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
“महिला सम्मान के खिलाफ मानसिकता”
अखिलेश यादव ने इस घटना को “महिला सम्मान के खिलाफ मानसिकता” बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में समाज और राजनीति दोनों को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महिला सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीन पर तस्वीर अलग नजर आती है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए जमानत मिलने के बाद स्वागत को सामान्य बता रहे हैं, जबकि कई यूजर्स इसे गलत संदेश देने वाला कदम बता रहे हैं। फिलहाल यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद बनता दिखाई दे रहा है।
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