ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ग्रेटर नोएडा में पिछले कुछ समय से पुलिस को शिकायतें मिल रही थीं कि लोग खुले में शराब पीकर सड़कों, पार्कों और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर हंगामा करते हैं, जिससे माहौल बिगड़ता है और कई बार स्थिति तनाव वाली हो जाती है।
इसी वजह से पुलिस ने तय किया कि अब सिर्फ समझाइश नहीं, बल्कि मौके पर पकड़कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शहर के कई हिस्सों में रात के समय भीड़ बढ़ने के साथ ऐसी गतिविधियों
की शिकायतें भी बढ़ती हैं, इसलिए कार्रवाई का फोकस सार्वजनिक
जगहों पर रहा।
यह भी सच है कि जब कोई सार्वजनिक जगह पर शराब पीकर शोर-शराबा करता है, तो उसका असर आसपास के परिवारों, महिलाओं, बच्चों और आने-जाने वालों पर पड़ता है। कई लोग सिर्फ घर लौट रहे होते हैं, लेकिन रास्ते में ऐसी भीड़ दिख जाए तो डर और असहजता अपने आप बढ़ जाती है। इसलिए इस अभियान को पुलिस “शांति व्यवस्था” से जोड़कर देख रही है।
एक रात में 383 लोग पकड़े गए
पुलिस के
मुताबिक सोमवार, 9 फरवरी की रात ग्रेटर नोएडा जोन
में विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया और कुल 383 लोगों को
सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीते हुए पकड़ा गया।
इन लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की
धारा 292 के तहत कार्रवाई की गई।
पुलिस ने बताया कि यह अभियान पूरे जोन में चलाया गया ताकि अलग-अलग
इलाकों में खुले में शराब पीने और हुड़दंग करने वालों पर एक साथ लगाम लगाई जा सके।
स्थानीय स्तर
पर यह संख्या इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह कार्रवाई किसी एक चौराहे या एक
बाजार तक सीमित नहीं रही। लोगों का कहना है कि आम तौर पर पुलिस कुछ जगहों पर सख्ती
करती है,
लेकिन इस बार कई थानों के इलाकों में एक साथ अभियान दिखा।
ऐसे में जो लोग रोजाना “खुले में जाम” को सामान्य मानकर बैठ गए थे,
उनके लिए यह साफ संदेश है कि अब ऐसा करना महंगा पड़ सकता है।
किन इलाकों में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई
अभियान के
दौरान थाना-वार आंकड़े भी सामने आए हैं।
पुलिस के मुताबिक नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र से 42, बीटा-2 से 28, दादरी से 52,
जारचा से 32, कासना से 75, ईकोटेक-प्रथम से 14, दनकौर से 62, जेवर से 62 और रबूपुरा से 16 लोगों
के खिलाफ कार्रवाई की गई।
इन आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि कार्रवाई केवल सिटी एरिया तक
सीमित नहीं रही, बल्कि अलग-अलग तरह के रिहायशी और भीड़भाड़
वाले हिस्सों तक पहुंची।
दादरी क्षेत्र
से 52
लोगों पर कार्रवाई की बात सामने आने के बाद आसपास के लोगों के बीच
भी चर्चा तेज हो गई।
कई लोग मानते हैं कि दादरी, दनकौर, जेवर जैसे इलाकों में देर रात कुछ जगहों पर भीड़ इकट्ठा होकर शराब पीने की
शिकायतें अक्सर सुनने को मिलती हैं, और इसी वजह से इस बार
वहां भी कड़ी कार्रवाई दिखी।
अभियान किसके निर्देशन में चला
यह विशेष
अभियान ग्रेटर नोएडा जोन के डीसीपी साद मियां खान के निर्देशन में चलाया गया।
पुलिस के अनुसार, सोमवार 9 फरवरी को पूरे जोन में चेकिंग कराई गई और सार्वजनिक जगहों पर शराब पीते
हुए लोगों को पकड़कर कार्रवाई की गई।
डीसीपी के हवाले से यह भी कहा गया कि सड़क, पार्क
या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर कानून तोड़ने की छूट नहीं दी जाएगी।
कई बार पुलिस
की कार्रवाई पर लोग यह सवाल भी पूछते हैं कि “आज अभियान,
कल ढील”—लेकिन इस बार पुलिस ने पहले दिन से संकेत दे दिया है कि यह
एक बार की कार्रवाई नहीं मानी जाए।
अधिकारियों का कहना है कि शहर में सुरक्षा और शांति बनाए रखने के
लिए आगे भी ऐसे अभियान चलेंगे।
शिकायतें क्या थीं, और पुलिस का फोकस क्या रहा
पुलिस का कहना
है कि उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि लोग खुले में शराब पीकर हंगामा करते
हैं और इससे कई बार हालात बिगड़ जाते हैं।
इसी को देखते हुए पुलिस ने “खुले में शराब” और “सार्वजनिक जगह पर
हुड़दंग” को अभियान का मुख्य बिंदु बनाया।
कार्रवाई के दौरान सड़कों, पार्कों, सार्वजनिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में चेकिंग किए जाने की बात भी
सामने आई है।
शहर में रहने वाले कई परिवारों के लिए यह मामला सिर्फ “शराब” का नहीं, बल्कि माहौल का है। देर रात गाड़ियों की आवाज, शोर, झगड़े और रास्ते में रोक-टोक जैसी चीजें आम लोगों की दिनचर्या पर असर डालती हैं। पुलिस का मानना है कि अगर शुरुआत में ही ऐसे लोगों पर कार्रवाई हो जाए, तो बाकी लोगों में भी डर रहता है और वे नियम तोड़ने से बचते हैं।
शहर वालों की प्रतिक्रिया
इस अभियान के
बाद कुछ शहरवासियों ने पुलिस की कार्रवाई का स्वागत किया और कहा कि इससे माहौल
बेहतर होगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि लोगों की राय में इससे अपराध पर भी
असर पड़ सकता है और महिलाओं-बालिकाओं की सुरक्षा के लिहाज से यह कदम ठीक है।
पुलिस का भी कहना है कि ऐसी कार्रवाई से अनुशासन बनेगा और सार्वजनिक
जगहों पर लोगों को सुरक्षित महसूस होगा।
हालांकि, कुछ लोग यह भी चाहते हैं कि कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता भी बढ़े—जैसे शराब की दुकानों के बाहर भीड़ न लगे, सड़क पर गिलास/बोतलें न फेंकी जाएं और रिहायशी इलाकों में रात को शोर न हो। यह मांग नई नहीं है, लेकिन अभियान के बाद यह बात फिर चर्चा में आई है।
आगे क्या: पुलिस का साफ संदेश
पुलिस ने साफ
कहा है कि भविष्य में भी इस तरह के विशेष अभियान जारी रहेंगे और सार्वजनिक स्थानों
पर कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
डीसीपी के हवाले से यह भी कहा गया कि शहर में सुरक्षा और शांति का
माहौल बनाए रखने के लिए कार्रवाई लगातार चलती रहेगी।
इसका मतलब यह है कि आने वाले दिनों में भी रात के समय चेकिंग और
सार्वजनिक जगहों पर निगरानी बढ़ सकती है।
आम लोगों के
लिए सबसे सीधी बात यही है: अगर शराब पीनी है तो कानून और नियम के दायरे में रहकर
ही रहें,
सार्वजनिक जगहों पर ऐसा करना खुद भी मुश्किल में डाल सकता है और
दूसरों के लिए भी परेशानी बनता है।
पुलिस के इस अभियान से यह संकेत भी मिलता है कि अब “यह तो रोज का
है” वाली सोच पर ब्रेक लगाने की कोशिश हो रही है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!