ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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असम में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। इसी बीच असम बीजेपी की ओर से सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी ने यह वीडियो डिलीट तो कर दिया, लेकिन मामला अब भी शांत नहीं हुआ है। विपक्षी दलों ने इस वीडियो को समाज में नफरत फैलाने वाला बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।
क्या है पूरा विवाद
यह वीडियो बीजेपी के एक आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर किया गया था। वीडियो में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को काउबॉय जैसी वेशभूषा में दिखाया गया है, जहां वे बंदूक चलाते नजर आते हैं। वीडियो में टोपी पहने दो लोगों को निशाने पर दिखाया गया, जिसे लेकर विपक्ष ने आरोप लगाया कि इसमें अल्पसंख्यक समुदाय को प्रतीकात्मक रूप से निशाना बनाया गया है।
वीडियो के अंत में “बांग्लादेशियों पर कोई दया नहीं”, “तुम पाकिस्तान क्यों गए?” और “विदेशी मुक्त असम” जैसी पंक्तियां लिखी हुई थीं। इसे “पाइंट ब्लैंक शॉट” कैप्शन के साथ पोस्ट किया गया था। विपक्ष का कहना है कि इस तरह का वीडियो चुनाव से पहले जानबूझकर समाज को बांटने की कोशिश है।
चुनावी साल में बढ़ी संवेदनशीलता
असम में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इस वीडियो को सीधे तौर पर चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि बीजेपी ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है और इस तरह के वीडियो से सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंच सकता है। उनका कहना है कि चुनावी माहौल में इस तरह के संदेश बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
के सी वेणुगोपाल का बीजेपी पर हमला
इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता और केरल के अलाप्पुझा से सांसद के सी वेणुगोपाल ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीजेपी के आधिकारिक चैनल से ऐसा वीडियो साझा किया गया, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है।
वेणुगोपाल ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा कि यह कोई मामूली वीडियो नहीं है, जिसे नजरअंदाज किया जा सके। उनके अनुसार, इस तरह का कंटेंट नफरत और हिंसा को बढ़ावा दे सकता है, जिसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
न्यायपालिका से कार्रवाई की मांग
के सी वेणुगोपाल ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि इस मामले में न्यायपालिका को सख्त कदम उठाने चाहिए और किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर किसी ठोस प्रतिक्रिया या कार्रवाई की उम्मीद नहीं है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी जमकर आलोचना हुई। कई यूजर्स ने इसे नफरत फैलाने वाला और भड़काऊ बताया। बढ़ते दबाव के बीच बीजेपी ने वीडियो को हटा दिया, लेकिन विपक्ष का कहना है कि सिर्फ वीडियो हटाने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।
सियासी घमासान जारी
फिलहाल यह विवाद असम ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। चुनाव से पहले इस तरह के विवाद ने सियासी माहौल और गर्मा दिया है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और इसका चुनावी राजनीति पर कितना असर पड़ता है।
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