ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पश्चिम बंगाल में वर्ष 2026 के लोकसभा चुनाव से पहले Mood of the Nation (MOTN) नामक ताज़ा सर्वे सामने आया है, जिसमें जनता की राजनीतिक पसंद और पार्टियों की संभावित सीटें बताई गई हैं। इस सर्वे का मकसद यह जानना है कि अगर आज ही चुनाव होते तो किस पार्टी को कितनी जीत मिल सकती थी।
राज्य की राजनीति में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच माना जा रहा है। पिछले लोकसभा चुनावों में TMC ने पश्चिम बंगाल की 42 सीटों में से 29 सीटें जीती थीं, जबकि BJP 12 सीटों के साथ दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। आज के सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि अगर चुनाव इस समय हो जाएं, तो TMC फिर भी बहुमत की मजबूत पकड़ रख सकती है। हालांकि BJP को भी कुछ सीटों में बढ़त मिलती दिखाई देती है।
किस पार्टी को कितनी सीटें मिल सकती हैं?
सर्वे के मुताबिक, TMC की सीट संख्या हल्की गिरावट के साथ अनुमानित 28 सीटें रह सकती है। यह 2024 के चुनाव में मिली 29 सीटों से केवल एक सीट कम है, जो बताता है कि पार्टी की लोकप्रियता अब भी मजबूत बनी हुई है। यह गिरावट संकेत देती है कि BJP और अन्य पार्टियों ने कुछ वोट शेयर हासिल किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि TMC की स्थिति कमजोर हो गई है। इसके उलट, यह दर्शाता है कि बंगाल में मुकाबला कड़ा है और दोनों तरफ मतदाताओं की दिलचस्पी बनी हुई है।
बीजेपी को हुई थोड़ी बढ़त
भाजपा की तरफ से पिछले सर्वे के मुकाबले थोड़ी बढ़त मिली है। पिछली रिपोर्ट में पार्टी को लगभग 11 सीटों का अनुमान था, जो ताज़ा सर्वे में बढ़कर 14 सीटें होने का अनुमान जताया गया है। इससे साफ लगता है कि BJP की चुनाव तैयारियाँ और संगठन में मजबूती की कोशिशों का असर हो रहा है। हालांकि यह बढ़त इतनी बड़ी नहीं है कि पार्टी को राज्य में सत्ता की दिशा बदल दे, लेकिन यह संकेत देती है कि BJP अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
वोट शेयर में बदलाव के संकेत
सर्वे में वोट शेयर के आंकड़े भी दिखाते हैं कि भारत में बीजेपी‑NDA का वोट शेयर लगभग 42% तक पहुंच सकता है, जबकि यह पहले 39% के आस‑पास था। इससे बंगाल में भाजपा के लिए थोड़ा समर्थन बढ़ने का संकेत मिलता है। वहीं TMC को बड़े हिस्से पर काबिज माना गया है। सर्वे विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़े चुनाव के पूरे परिणाम नहीं बतलाते, लेकिन इससे पता चलता है कि जनमानस में दोनों पक्षों के बीच संतुलन बना हुआ है।
पिछले सर्वे और बदलाव की कहानी
MOTN सर्वे समय‑समय पर जनता के रुझान को जानने के लिए किया जाता है। पिछले वर्षों के सर्वे में TMC की सीटों का अनुमान अधिक था, जबकि BJP को कम स्थान मिलने का अनुमान था। लेकिन इस नये 2026 सर्वे के मुताबिक BJP की सीटें बढ़ी हैं और TMC की अपेक्षित सीटों में थोड़ी गिरावट आई है।
यह बदलाव राजनीतिक विशेषज्ञों के लिए भी दिलचस्प है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि बंगाल के मतदाता अब भाजपा की बातों पर थोड़ा ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं। परंतु यह भी याद रखना जरूरी है कि ताज़ा मतदान और मंचों पर सियासी गतिविधियां अभी तक पूरी तरह तेज़ नहीं हुई हैं और अंतिम परिणाम अलग भी हो सकते हैं।
जनता की राय और चुनाव का माहौल
पश्चिम बंगाल के लोग चुनावी माहौल पर अपनी राय जाहिर कर रहे हैं और स्थानीय मुद्दे, रोजगार, विकास, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं जैसे विषय भी उनकी चुनाव‑विचारधारा को प्रभावित कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में भाजपा ने संगठनात्मक बदलाव किए हैं और बूथ‑स्तर पर कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ाई है, ताकि वह 2026 के चुनाव में ज्यादा वोट हासिल कर सके।
बताया जा रहा है कि बीजेपी राज्य के लोगें को विकास, सुरक्षा और जातीय मुद्दों के आधार पर प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। भाजपा ने बांग्लादेशी अवैध आव्रजन, महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को अपने चुनावी एजेंडा में शामिल किया है।
वहीं तृणमूल कांग्रेस पार्टी, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में लोगों को स्थानीय विकास और राज्य‑विशेष योजनाओं के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रही है। पार्टी ने कहा है कि उसने पिछले चुनावों में बंगाल के लिए कई लोकहितकारी योजनाएं लागू की हैं और जनता अब भी इसका समर्थन करना चाहती है।
राजनीतिक कार्यकर्ता और नेताओं का दृष्टिकोण
राजनीतिक कार्यकर्ता और स्थानीय नेताओं का कहना है कि बंगाल के मतदाता अनुभवी लीडरशिप और स्थानीय भावनाओं को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। कई बीजेपी समर्थक नेताओं का मानना है कि पार्टी की कोशिशें सफल रही हैं क्योंकि वोट शेयर में उनका प्रतिशत बढ़ा है। वहीं TMC समर्थकों का कहना है कि पार्टी का जनाधार अभी भी बहुत मज़बूत है और वह अधिकांश सीटों पर जीत दर्ज करेगी।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि बंगाल में चुनाव की लड़ाई सीधी मुकाबले वाली नहीं, बल्कि यह दो पक्षों के बीच ही सबसे कड़ी मिलती है। कई इलाकों में विपक्ष के वोट शेयर में बँटवारा होने के कारण परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। इसीलिए स्थानीय नेता और पार्टी कार्यकर्ता दोनों ही अधिक से अधिक मतदाताओं तक पहुँचने पर पूरा जोर लगा रहे हैं।
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