ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
बिहार की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।सूत्रों के हवाले से खबर है कि 15 अप्रैल को बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है, और इसी संभावना ने राज्य की राजनीति को गर्म कर दिया है।
पटना में जमीन पर दिख रही तैयारियों ने इन चर्चाओं को और मजबूत कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार राजधानी पटना की
सड़कों के किनारे बांस से घेराबंदी का काम शुरू हो गया है और मजदूर इस तैयारी में
जुटे दिखे।
इन तैयारियों को संभावित शपथ ग्रहण समारोह से जोड़कर देखा जा रहा है।
जब राजधानी का माहौल अचानक इस तरह बदलने लगे, तो राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज होना स्वाभाविक है।
तैयारी सिर्फ प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक भी
खबर में कहा गया है कि बीजेपी ने भी
अपनी तैयारी शुरू कर दी है और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक
बनाया गया है, जो 14 अप्रैल को पटना पहुंच सकते हैं।
इसके साथ यह भी बताया गया कि संभावित शपथ ग्रहण कार्यक्रम में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पटना पहुंचने की भी तैयारी की जा रही है।
प्रधानमंत्री के आगमन की संभावना को देखते हुए पटना एयरपोर्ट के
रास्ते बैरिकेडिंग का काम शुरू होने की बात भी सामने आई है।
अगर यह पूरा कार्यक्रम तय समय पर होता
है, तो बिहार की
राजनीति में यह बड़ा मोड़ माना जाएगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि करीब 21 साल तक नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ने और सरकार में रहने वाली
बीजेपी पहली बार अपना मुख्यमंत्री बना सकती है।
यही कारण है कि यह खबर सिर्फ नाम बदलने की नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक संतुलन के बदलने
की तरह देखी जा रही है।
किन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा
मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों
में सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रमुख बताया गया है।
इसके अलावा श्रेयसी सिंह का नाम भी चर्चा में है और रिपोर्ट में कहा
गया कि अगर महिला मुख्यमंत्री बनाने का फैसला होता है तो उनका नाम आगे आ सकता है।
जनक राम और डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के नाम भी इस दौड़ में बताए गए
हैं।
विजय सिन्हा के बारे में कहा गया है
कि उन्हें संगठन और पार्टी में काम करने का लंबा अनुभव है।
यानी चर्चा सिर्फ लोकप्रिय चेहरे पर नहीं, बल्कि संगठनात्मक पकड़ और राजनीतिक उपयोगिता पर भी टिकी हुई है।
बिहार जैसे राज्य में मुख्यमंत्री का चेहरा तय करते समय जातीय संतुलन, संगठन, क्षेत्रीय संदेश और भविष्य की रणनीति, सब एक साथ देखे जाते हैं।
दूसरी ओर क्या कह रहा सहयोगी दल
इन सब अटकलों के बीच जेडीयू के
राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि सबकुछ सामान्य है और पहले से तय
योजना के अनुसार चल रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कहीं कोई समस्या नहीं है।
यह बयान बताता है कि आधिकारिक स्तर पर माहौल को सामान्य दिखाने की
कोशिश की जा रही है, चाहे
अंदरूनी हलचल कितनी भी क्यों न हो।
राजनीति में अक्सर सबसे ज्यादा शोर
उन्हीं दिनों में होता है, जब आधिकारिक बयान सबसे ज्यादा शांत होते हैं।
बिहार में इस समय कुछ ऐसा ही माहौल बनता दिख रहा है, जहां तैयारी दिख रही है, नाम चल रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला अब भी पर्दे में
है।
यही अनिश्चितता इस खबर को और बड़ा बना रही है।
आगे क्या देखना होगा
अब सबकी नजर 14 और 15 अप्रैल
की गतिविधियों पर टिकी रहेगी, क्योंकि इन्हीं तारीखों के आसपास सबसे ज्यादा हलचल बताई जा रही है।
अगर शपथ ग्रहण होता है और नया चेहरा सामने आता है, तो यह बिहार की राजनीति में लंबे समय
तक असर छोड़ने वाला घटनाक्रम होगा।
और अगर आखिरी वक्त पर तस्वीर बदलती है, तब भी यह साफ हो जाएगा कि बिहार की राजनीति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं
है।
फिलहाल सच यही है कि पटना की सड़कों
से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इंतजार का माहौल है।
नाम कई हैं, दावे कई हैं, लेकिन अंतिम मुहर अभी बाकी है।
यही वजह है कि बिहार इस समय सिर्फ खबर नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक सस्पेंस बना हुआ है।
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