ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के वोट चोरी और चुनाव सुधार पर सवाल उठाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष और कांग्रेस पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने मतदान, मतदाता सूची और SIR (मतदाता सूची शुद्धिकरण) को लेकर कई ऐतिहासिक और वर्तमान तथ्य साझा किए।
राहुल गांधी के सवाल और अमित शाह का जवाब
राहुल गांधी ने चर्चा के दौरान तीन बड़े सवाल उठाए—
1. चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया
2. चुनाव आयोग की भूमिका
3. चुनावों में CCTV फुटेज हटाने के मामले
अमित शाह ने इन सवालों का एक-एक कर जवाब देते हुए कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का चुनाव हारने का कारण ईवीएम या वोट चोरी नहीं बल्कि उनका नेतृत्व है। शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उन्होंने 11 साल से ईवीएम और वोट चोरी की बातें करते हुए चुनाव सुधारों पर कभी भी चुनाव आयोग को कोई सुझाव नहीं दिया।
SIR और मतदाता सूची सुधार की जरूरत
अमित शाह ने कहा कि विपक्ष SIR पर झूठ फैला रहा है और देश की जनता को गुमराह कर रहा है। उन्होंने SIR को स्पष्ट किया—किसी की मौत होने पर नाम काटना, 18 साल की उम्र पर नाम जोड़ना और घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना ही SIR है।
शाह ने बताया कि घुसपैठियों को मतदाता सूची में डालने से देश असुरक्षित हो सकता है, इसलिए इसकी शुद्धि बेहद जरूरी है। उन्होंने विपक्ष की नीति की आलोचना की, जिसमें घुसपैठियों को नॉर्मलाइज और फॉर्मलाइज करने की कोशिश की जा रही है।
इतिहास के उदाहरण और कांग्रेस पर निशाना
अमित शाह ने इतिहास के पन्ने पलटते हुए कहा कि कुछ परिवार पुश्तैनी वोट चोरी करते आए हैं। उन्होंने तीन ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र किया—
1. सरदार पटेल को ज्यादा वोट मिलने के बावजूद नेहरू का पीएम बनना
2. हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए गए इंदिरा गांधी के चुनाव फैसले को पलटना
3. सोनिया गांधी का भारत की नागरिकता मिलने से पहले वोटर बनना
शाह ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को घुसपैठियों पर बोलने पर सदन का बहिष्कार करना पसंद है, जबकि इतिहास पर बोलने पर उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य और विपक्ष की आलोचना
गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष ने सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक, 370 हटाना, राम मंदिर निर्माण, CAA और तीन तलाक जैसे मुद्दों का विरोध किया। उन्होंने राहुल गांधी की बिहार में घुसपैठिया-बचाओ यात्रा और टीएमसी की बंगाल में घुसपैठियों को बचाने की कोशिशों का उदाहरण देते हुए कहा कि जनता विपक्ष को कभी माफ नहीं करेगी।
अमित शाह ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि SIR एक संवैधानिक प्रक्रिया है और विपक्ष द्वारा इस पर सवाल उठाना भारत के लोकतंत्र की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि मोदी सरकार ने चुनाव आयोग की नियुक्तियों में विपक्ष को शामिल किया, जबकि कांग्रेस के समय यह सिर्फ प्रधानमंत्री का निर्णय होता था।
शाह का संदेश साफ है—मतदाता सूची का शुद्धिकरण जरूरी है और कांग्रेस और विपक्ष के दोहरे मापदंड अब नहीं चलेंगे। देश के लिए, लोकतंत्र की सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना भाजपा की प्राथमिकता है।
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