ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का 28 जनवरी 2026 को बारामती में हुए विमान हादसे में निधन ने पूरे देश को दुखी किया है। इस दर्दनाक घड़ी में एक भावुक कहानी और सामने आई है — उनकी मां की प्रतिक्रिया और परिवार की कोशिशें कि उन्हें यह खबर गंभीर रूप से न पता चले। यह खबर मानवीय भावनाओं और परिवार की संवेदनशीलता को उजागर करती है।
सुबह की शुरुआत और पहली प्रतिक्रिया
सबेरे जैसे-तैसे सभी तैयार हो रहे थे, उसी बीच आशाताई पवार, जो पवार परिवार की मातृ-शक्ति थीं, टीवी पर सुबह की खबरें देख रही थीं। उसी समय अचानक अजित पवार का विमान दुर्घटना का फ्लैश न्यूज़ चला। आशाताई ने अनभिज्ञता में पूछा, “क्या दादा का एक्सीडेंट हुआ है?”
उनका यह सामान्य सा सवाल उस वक्त परिवार वालों के दिल को छू गया, क्योंकि वे जानते थे कि यह मामला सिर्फ हल्का एक्सीडेंट नहीं है। परंतु मां को गंभीर सच से बचाने के लिए उन्होंने तुरंत ही टीवी केबल काट दी और कहा कि “तकनीकी खराबी आ गई है।”
परिवार की भावनात्मक प्रतिक्रिया
इतना ही नहीं, परिवार ने आशाताई के मोबाइल को भी फ़्लाइट मोड पर डाल दिया, ताकि सड़क-सड़क से आने वाली ब्रेकिंग न्यूज की आवाज़ उनके कान तक न पहुंचे। यह संवेदनशील कदम इतना भावुक था कि यह केवल खबर दबाने का प्रयास नहीं, बल्कि एक मां को दिल टूटने से बचाने की कोशिश थी। परिवार चाहता था कि आशाताई को इस दर्दनाक सच्चाई का सामना न करना पड़े।
मां की चिंता और परिवार की कोशिशें
हालांकि आशाताई बार-बार बेटे के बारे में पूछती रहीं और उनके बाहर जाने की जिद करती रहीं। वे पैदल ही बाहर निकलने की कोशिश भी करने लगीं, यह सोचकर कि शायद उनके बेटे को हल्की चोट आयी होगी। परिवार ने उन्हें फार्महाउस के भीतर ही रोकने के लिए हर संभव कोशिश की — ड्राइवर से लेकर घर वाले तक हर कोई मानाने लगे कि गाड़ी खराब है और बाहर जाने की जरूरत नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम को देखकर यह साफ होता है कि परिवार सिर्फ सच छिपा नहीं रहा था, बल्कि एक बुढ़ती माँ के दिल को टूटने से बचाने की कोशिश कर रहा था।
एक मां का दर्द, एक परिवार की चिंता
जब कोई अपना इतनी ऊंची स्थिति पर हो और अचानक से उसकी ज़िंदगी खतरे में पड़ जाए, तो परिवार के लिए इससे बड़ा सदमा और क्या हो सकता है? यह बात पवार परिवार के इस व्यवहार से साफ होती है कि उन्होंने मां को सच बताने से पहले उसकी भावनाओं को प्राथमिकता दी। इस घटना को देख कई लोगों ने सोशल मीडिया पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है कि परिवार के लिए पहले सच की जगह मानवीय संवेदनाएँ महत्वपूर्ण थीं।
अजित पवार की राजनीतिक पहचान और दुख
अजित पवार सिर्फ एक नेता नहीं थे, बल्कि राजनीति में दशकों से एक जाना-माना चेहरा थे। उनका निधन न सिर्फ उनके परिवार बल्कि राजनीतिक दुनिया में भी बड़ा झटका है।
उनकी मां ने पहले से ही बेटे के लिए बड़ी उम्मीदें जाहिर की थीं, जैसे-कि “मैं जिंदा रहते हुए देखना चाहती थी कि मेरा बेटा महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बने”, जिससे पता चलता है कि उनके सपने कितने बड़े थे।
परिवार की मजबूरी या संवेदना?
कुछ लोग पूछ रहे हैं कि क्या परिवार ने सच छिपाया या यही संवेदनशील फैसलों में से एक था? वास्तव में परिवार की हर कोशिश में प्यार और चिंता झलकती है, क्योंकि मां के सामने अचानक यह सच लाना उनके लिए आसान नहीं था।
जब परिवार ने टीवी केबल काट दिया, मोबाइल फ़्लाइट मोड में डाला और मां को बाहरी खबरों से दूर रखा — यह सिर्फ खबर नहीं रोकना नहीं था, बल्कि एक माँ को मानसिक सदमे से बचाना था।
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