8 फरवरी को एनसीपी के दोनों गुटों का विलय तय था लेकिन हादसे ने रुकवा दिया
महाराष्ट्र के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों को फिर से एक करने के लिए पूरी तरह तैयार थे। 8 फरवरी को विलय की घोषणा होने वाली थी, लेकिन अचानक विमान हादसे में उनकी मौत ने योजना को रोक दिया।
8 फरवरी को एनसीपी के दोनों गुटों का विलय तय था लेकिन हादसे ने रुकवा दिया
  • Category: राजनीति

महाराष्ट्र की राजनीति पिछले कई सालों से एक दिलचस्प और कभी-कभी विवादास्पद मोड़ लेती रही है। 2023 में जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) दो हिस्सों में बंट गई थी, तब से ही दोनों गुटों के बीच दूरी बनी हुई थी। एक गुट शरद पवार के नेतृत्व में, जबकि दूसरा गुट उनके भतीजे अजित पवार के नेतृत्व में चला।

 

इन दोनों गुटों के बीच दूरी का कारण मुख्य रूप से राजनीतिक दिशा और गठबंधन की प्राथमिकताएँ थीं। अजित पवार ने 2023 में बीजेपी-शिवसेना (उद्धव ठाकरे) गठबंधन के साथ गठजोड़ किया था, जबकि शरद पवार ने अलग राजनीतिक पथ अपनाया और महाविकास आघाड़ी (एमवीए) में शिरकत की। हालांकि इस दूरी के बावजूद दोनों गुटों के बीच फिर से एक होने के लिये बातचीत हुई, और यह बातचीत इतनी आगे बढ़ चुकी थी कि विलय की घोषणा 8 फरवरी 2026 को होने वाली थी — बस कुछ ही दिनों की बात थी।

 

टकराव से समझौते तक का सफर

पिछले कुछ महीनों में दोनों गुटों ने कदम मिलाने की दिशा में कई प्रयास किये। जनवरी में पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम चुनावों में दोनों गुटों ने मिलकर चुनाव लड़ा और एक संयुक्त घोषणापत्र भी जारी किया। यह कदम राजनीति में फिर से एकता की उम्मीद जगाने वाला सबूत था। ऐसा माना जा रहा था कि जिले और स्थानीय स्तर के चुनावों के बाद, 8 फरवरी को正式 विलय की घोषणा कर दी जाएगी। अजित पवार के करीबी सहयोगियों के अनुसार, विलय की प्रक्रिया लगभग पूरी थी और आख़िरी दौर की बातचीत भी सफल हो चुकी थी।

 

उनके एक करीबी सहयोगी किरण गुजर ने बताया कि पैक्स-बैक चैनल पर बातचीत इतनी आगे बढ़ चुकी थी कि अजित पवार ने कहा थापूरा विलय एकदम तय है और कुछ दिनों में इसे घोषित कर दिया जाएगा।

 

8 फरवरी की योजना और राजनीतिक मायने

जहाँ 8 फरवरी को विलय तय था, वहीं इस तारीख का राजनीतिक महत्व भी बहुत बड़ा माना जा रहा था। विलय से NCP में एकता लौट सकती थी और महाराष्ट्र की राजनीति में स्थिरता भी बढ़ सकती थी। इससे पहले पार्टी में दो गुटों के बीच मतभेद काफी स्पष्ट रहे हैं, जिनके कारण दोनों पक्षों की राजनीति अलग राहों पर देखी जाती थी।

 

विशेषज्ञों के अनुसार, यह विलय शरद पवार की उम्र और अनुभव को ध्यान में रखकर भी एक अहम् कदम माना जा रहा था। इससे पार्टी को भविष्य के चुनावों में मजबूत नेतृत्व मिलता और दोनों परिवारों के बीच दूरी भी कम होती।

 

दुर्भाग्यपूर्ण विमान हादसा और राजनीति का नया मोड़

लेकिन 28 जनवरी की सुबह महाराष्ट्र के बिलकुल अपने गृह क्षेत्र में एक दुर्घटना ने सब कुछ बदल दिया। अजित पवार का विमान बारामती के पास हादसे का शिकार हो गया, जिसमें उनकी और चार अन्य लोगों की मौत हो गई।

 

यह हादसा राजनीति की दिशा बदलने वाला मोड़ साबित हुआ। जहां तक विलय की योजना थी, वह अचानक ठहर गई। पार्टी के अंदर भी अचानक से एक नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया, क्योंकि अब अजित पवार मौजूद नहीं थे और उनका नेतृत्व इस दिशा में नहीं ले जा सकता था।

 

पार्टी के भीतर की स्थिति आज

अजित पवार की मौत के बाद NCP में नेतृत्व को लेकर असमंजस भी बढ़ गया है। उनके गुट में अब कोई स्पष्ट दूसरा नेता नहीं है जिसकी पकड़ उतनी मजबूत मानी जाती हो। इस वजह से पार्टी को भविष्य की दिशा तय करने में कठिनाई हो रही है।

 

वहीं शरद पवार गुट के नेताओं का कहना है कि अब आगे पार्टी को एकजुट करने की दिशा में काम करऩा होगा। हालांकि अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है कि विलय प्रक्रिया फिर से कब चलेगी या किस रूप में होगी।

 

राजनीतिक विश्लेषण: आगे क्या हो सकता है?

राजनीतिक विश्लेषकों की राय है कि अगर दोनों गुट वास्तव में फिर से एक होते तो महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव आता। यह बदलाव केवल NCP के लिए ही नहीं बल्कि राज्य की सरकार और अन्य पार्टियों के गठबंधन पर भी असर डाल सकता था। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर विलय होता, तो यह कदम महाविकास आघाड़ी और महायुति दोनों को प्रभावित कर सकता था, क्योंकि दोनों में से एक गुट पहले से ही महायुति का हिस्सा है और दूसरा एमवीए के साथ जुड़ा हुआ है। इस तरह के कदम राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे सकता था।

 

बहरहाल, अब इस सवाल का जवाब अगले कुछ हफ्तों और महीनों में मिलने की उम्मीद है, जब NCP के नेता और कार्यकर्ता मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे।

 

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