ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
23 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मिशन साउथ’ के तहत केरल और तमिलनाडु का दौरा कर रहे हैं। यह यात्रा 2026 में होने वाले केरल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी और उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की चुनावी रणनीति का एक अहम हिस्सा मानी जा रही है। दक्षिण भारत पारंपरिक रूप से बीजेपी के लिए मजबूत क्षेत्र नहीं रहा है, लेकिन इस दौरे से भाजपा दक्षिण में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास करेगी।
पिछले एक दशक में बीजेपी उत्तर तथा पश्चिमी राज्यों में तो काफ़ी मजबूत हुई है, लेकिन दक्षिण भारत में उसकी स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रही है। यही कारण है कि मोदी इस दौरे को ‘रणनीतिक’ भी बता रहे हैं—केवल विकास की योजनाओं के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक माहौल बनाने और गठबंधन की एकता दिखाने के लिए भी।
केरल में विकास की सौगातें और योजनाएं
मोदी केरल में सबसे पहले विकास परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे। इनमें तीन नई ‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाना शामिल है, जो दक्षिण भारत में बेहतर रेल संपर्क का प्रतीक हैं। इसके साथ ही एक नई पैसेंजर ट्रेन सेवा भी शुरू की जाएगी, जिससे यात्रा आसान और सुरक्षित होगी।
प्रधानमंत्री ने PM SVANidhi Credit Card की शुरुआत भी की, जो छोटे विक्रेताओं, रेहड़ी-पटरी वालों और फुटपाथ व्यापारियों को वित्तीय समावेशन और सहायता देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना विशेष रूप से शहरी और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों के गरीब वर्ग के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से लाई गई है।
इसके अलावा मोदी ने CSIR–NIIST इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और एंटरप्रेन्योरशिप हब की आधारशिला भी रखी, जो केरल को एक स्टार्ट-अप और अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद करेगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर मिल सकते हैं।
केरल में इस दौरे का राजनीतिक महत्व भी है। पिछले साल तिरुवनंतपुरम में बीजेपी ने नगर निगम चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जो राज्य में पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता का संकेत है। मोदी के इस दौरे से पार्टी को और वोटरों के बीच विश्वास बढ़ाने का मौका मिलेगा।
तमिलनाडु में चुनावी बिगुल
केरल से अपनी विकास योजनाओं की सौगात देने के बाद पीएम मोदी तमिलनाडु रवाना होंगे। यहां वह NDA के चुनाव अभियान की औपचारिक शुरुआत करेंगे। प्रधानमंत्री मदुरांतकम में एक जनसभा को संबोधित करेंगे, जिसमें राज्य के सहयोगी दलों के नेता भी उनके साथ मंच साझा करेंगे।
इस सभा में AIADMK, PMK, தமிழ் மக்கள் காசி (Tamil Manila Congress), AMMK और अन्य NDA घटक दलों के प्रमुख नेता मौजूद रहेंगे, जिसका उद्देश्य चुनावी गठबंधन की एकता और ताकत दिखाना है।
पीएम मोदी के भाषा में यह जनसभा सरकार-नीति के मुद्दों को जनता तक पहुंचाने और जनता को NDA के विकास मॉडल से जोड़ने का प्रयास है। भाजपा तमिलनाडु में डीएमके सरकार को चुनौती देने के लिए इस गठबंधन और मोदी की लोकप्रियता का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक रणनीति: विकास की छवि बनाम चुनावी समर्थन
मोदी की यह यात्रा सिर्फ आकस्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि बीजेपी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। दक्षिण भारत में पार्टी को अब तक सत्ता में जीत हासिल करने में मुश्किलें आई हैं, लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों में मिले सकारात्मक नतीजे और साझेदारी गठबंधन का विस्तार भाजपा की दिशा को बदल रहे हैं।
केरल और तमिलनाडु जैसी पथरीली राजनीतिक जमीन पर पार्टी यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह विकास केंद्रित शासन और स्थानीय लोगों के आर्थिक कल्याण के मुद्दों को प्राथमिकता देती है। रेलवे, शहरी रोजगार योजनाएं, नवाचार केंद्र जैसे मुद्दे जनता को सीधे लाभ पहुंचाने वाले नजरिए के रूप में पेश किये जा रहे हैं, ताकि पार्टी की छवि सिर्फ राजनीति तक सीमित न रहे बल्कि लोककार्य और सामाजिक कल्याण के रूप में दिखे।
दक्षिण राजनैतिक नक्शा: बीजेपी की चुनौती
दक्षिण में केरल और तमिलनाडु दोनों ही राज्यों में भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण राजनीतिक माहौल रहा है। केरल में लंबे समय से कांग्रेस-लेफ़्ट के गठबंधन का प्रभुत्व रहा है, जबकि तमिलनाडु में द्रविड़ पार्टियों का प्रभाव हमेशा मजबूत रहा है। ऐसे में मोदी की यात्रा को एक राजनीतिक संदेश माना जा रहा है, जिसमें दक्षिण भारत के मतदाताओं को विकास, सहारा और एकता का आश्वासन देना शामिल है।
भाजपा का लक्ष्य सिर्फ वोट हासिल करना नहीं है बल्कि दक्षिण में अपना राजनीतिक आधार तैयार करना है। यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले कुछ महीनों में केरल और तमिलनाडु के अलावा पुडुचेरी जैसे राज्यों में भी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और यहां का राजनीतिक असर राष्ट्रीय स्तर पर भी महसूस किया जाता है।
गठबंधन विस्तार और एकता का प्रदर्शन
तमिलनाडु के NDA कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले कई सहयोगी दल मोदी के नेतृत्व में अपने समर्थन का खुलकर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह दिखाता है कि भाजपा अकेले नहीं बल्कि स्थानिक दलों के समर्थन के साथ चुनावी मैदान में उतरने को तैयार है।
रैली में NDA नेताओं के साथ मंच साझा करना स्थानीय मतदाताओं को यह संकेत देता है कि गठबंधन मजबूत है और सभी घटक दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे। भाजपा की रणनीति है कि वह अपनी राष्ट्रीय पहचान के साथ स्थानीय साझेदारों को जोड़कर जनता के बीच विश्वास पैदा करे।
जनता और नेताओं की प्रतिक्रिया
मोदी के इस दौरे को स्थानीय जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं ने उत्साह से लिया है। केरल में जहाँ लोग विकास योजनाओं के स्वागत में जुटे हैं, वहीं तमिलनाडु में सहयोगी दलों के साथ आयोजित जनसभाओं में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। इससे लगता है कि NDA की आवाज दक्षिण भारत में भी धीरे-धीरे पहुँच रही है।
दोनों राज्यों में यह भी देखा जा रहा है कि प्रधानमंत्री की मौजूदगी से स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में जोश और उम्मीद बनी है। किसी भी बड़े राजनीतिक बदलाव से पहले यही उत्साह और समर्थन महत्वपूर्ण होता है। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि लोकहित और राजनीतिक समर्थन दोनों को एक मंच पर बाँधने की कोशिश की जा रही है।
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