ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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बिहार जीत के बाद दिल्ली में जश्न और मंथन
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर एक खास डिनर बैठक रखी गई। इस मीटिंग में उन नेताओं को बुलाया गया जिन्होंने बिहार चुनाव में बतौर प्रवासी नेता जाकर प्रचार और मैनेजमेंट संभाला था।
बैठक में जेपी नड्डा के साथ गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और बिहार चुनाव से जुड़े अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। डिनर के बहाने यह एक तरह से धन्यवाद और आगे की रणनीति दोनों का मंच बन गया।
अमित शाह का बड़ा संदेश: जीत किसी एक की नहीं
सूत्रों के अनुसार अमित शाह ने मीटिंग में साफ कहा कि बिहार की जीत केवल एक राज्य की जीत नहीं, बल्कि पूरे भारत के संकल्प की जीत है। उन्होंने घुसपैठियों के खिलाफ चल रहे नैरेटिव को जोड़ते हुए इसे देश की सुरक्षा और सामाजिक संरचना बचाने की जीत बताया।
शाह का एक अहम संदेश यह भी था कि कोई भी नेता यह न समझे कि यह जीत सिर्फ उसकी वजह से मिली है। उन्होंने चेताया कि ऐसा सोचने से घमंड आता है, जबकि बीजेपी की ताकत सामूहिक मेहनत और कार्यकर्ता-आधारित संगठन से आती है।
‘जहां कम वहां हम’: कार्यकर्ता मोड ऑन
अमित शाह ने नेताओं से कहा कि चुनाव में हर किसी का योगदान मायने रखता है, चाहे वह 1 प्रतिशत ही क्यों न हो। लेकिन जिम्मेदारी सिर्फ खुद को क्रेडिट देने की नहीं, बल्कि “जहां कम वहां हम” के फॉर्मूले के साथ कमजोर इलाकों में जाकर काम करने की है।
उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी नेता और कार्यकर्ता हमेशा “वर्कर मोड” में रहें, क्योंकि पार्टी किसी भी समय, किसी भी राज्य में, किसी को भी ड्यूटी दे सकती है। साफ संदेश था कि आराम का समय नहीं, बल्कि अगली चुनौतियों की तैयारी का समय है।
अब फोकस बंगाल पर क्यों?
बैठक में अगला बड़ा टारगेट साफ तौर पर पश्चिम बंगाल चुनाव को बताया गया। अमित शाह ने कहा कि अब सभी को बंगाल की लड़ाई के लिए तैयार रहना है, यानी बिहार जीत के जोश को सीधे बंगाल के अभियान में कन्वर्ट किया जाएगा।
बीजेपी लंबे समय से बंगाल में मजबूत पैठ बनाना चाहती है और वहां की सत्ता परिवर्तन को अपने बड़े राजनीतिक लक्ष्यों में से एक मानती है। ऐसे में दिल्ली में हुई यह डिनर मीटिंग सिर्फ सेलिब्रेशन नहीं, बल्कि बंगाल मिशन की शुरुआती घंटी भी मानी जा रही है।
मिथिला मखाना से मधुबनी शॉल तक – प्रतीकात्मक राजनीति
डिनर कार्यक्रम में नेताओं को मिथिला का प्रसिद्ध मखाना, गया का तिलकुट और मधुबनी पेंटिंग वाली शॉलें भेंट की गईं। ये सिर्फ गिफ्ट नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े प्रतीक भी हैं, जिनके जरिए पार्टी ने “बिहार की मिट्टी” का सम्मान दिखाया।
ऐसे प्रतीकात्मक कदम बीजेपी के लिए दोहरी भूमिका निभाते हैं – एक तरफ कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है, दूसरी तरफ संदेश जाता है कि पार्टी क्षेत्रीय पहचान और स्थानीय संस्कृति को भी महत्व देती है।
राजनीतिक संदेश: जीत के बाद अनुशासन
कुल मिलाकर, इस डिनर मीटिंग का मकसद साफ दिखा – जीत के बाद जश्न के साथ-साथ अनुशासन का डोज देना। अमित शाह ने नेताओं को यह याद दिलाया कि चुनावी सफलता के बाद अगर अहंकार हावी हो जाए, तो संगठन कमजोर पड़ने लगता है।
साथ ही, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बीजेपी की राजनीति “एक चुनाव” पर नहीं रुकती, बल्कि अगले राज्यों और राष्ट्रीय रणनीति तक लगातार चलती रहती है।
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