ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद भवन के संविधान सदन (Samvidhan Sadan) के सेंट्रल हॉल में 28वीं कॉन्फ़रेंस ऑफ़ स्पीकर्स एंड प्रिसाइडिंग ऑफिसर्स ऑफ़ द कॉमनवेल्थ (CSPOC) 2026 का भव्य उद्घाटन किया। इस मौके पर 42 राष्ट्रमंडल देशों के 61 संसदीय अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी शामिल हुए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश भी समारोह में मौजूद थे।
लोकतंत्र को भारत ने बनाया सशक्त
अपने उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने विविधता को अपनी लोकतंत्र की ताकत में बदल दिया है। स्वतंत्रता के समय यह चिंता व्यक्त की गई थी कि इतनी विविधता वाले देश में लोकतंत्र कैसे टिकेगा, लेकिन भारत ने इतिहास साबित कर दिया है कि यह संभव है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाएं और प्रक्रियाएं देश को स्थिरता, गति और व्यापकता प्रदान करती हैं।
मोदी ने यह भी बताया कि भारत में लोकतंत्र का अर्थ है बिना किसी भेदभाव के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की सेवाएं पहुंचाना। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में करीब 25 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकले, जो लोकतंत्र की प्रभावशीलता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
संसद का इतिहास और संविधान सदन
मोदी ने संविधान सदन के ऐतिहासिक महत्व को भी रेखांकित किया। इस जगह पर स्वतंत्रता के समय संविधान पर गहन विचार-विमर्श किया गया था, और यह भारत के लोकतंत्र की नींव रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक बताया जो आज भी देश की दिशा को निर्धारित करता है।
उन्होने कहा कि भारत का लोकतंत्र आज दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसमें हाल के आम चुनाव में लगभग 98 करोड़ लोगों ने मतदाता के रूप में पंजीकरण कराया। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय लोकतंत्र कितने बड़े पैमाने पर काम करता है।
भारत की वैश्विक भूमिका और ग्लोबल साउथ
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत लोकतंत्र की ताकत को सिर्फ अपने देश में नहीं बल्कि वैश्विक मंच पर भी उजागर कर रहा है। उन्होंने वैश्विक दक्षिण (Global South) के मुद्दों को वैश्विक एजेंडों में प्रमुखता से उठाने का जिक्र किया। भारत ने G20 की अध्यक्षता के दौरान भी इन प्राथमिकताओं को सामने रखा था।
मोदी ने यह भी कहा कि भारत अपनी तकनीकी क्षमताओं को साझा करने के लिए तैयार है और ओपन-सोर्स तकनीक प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है ताकि राष्ट्रमंडल देशों सहित अन्य साझेदार देशों को भी डिजिटल लोकतांत्रिक संरचना बनाने में मदद मिल सके।
संसदीय लोकतंत्र की मजबूती
अपने भाषण में मोदी ने संसदीय लोकतंत्र के महत्व पर बल दिया और कहा कि यह केवल विधायिका के भीतर बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने और शासन को सभी तक पहुंचाने की प्रक्रिया है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में संवाद और विचारों की विविधता लोकतंत्र की आत्मा है।
उन्हें विश्वास है कि CSPOC जैसे मंच देशों के बीच संसदीय अनुभव साझा करने और लोकतंत्र को और सुदृढ़ करने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि सांसदों और संसदीय अधिकारियों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखने और साझा अनुभवों से लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
तकनीक और लोकतंत्र का संगम
सीएसपीओसी 2026 सम्मेलन में तकनीक और लोकतंत्र के मेल को भी प्रमुख विषय बनाया गया है। जैसे‑जैसे दुनिया डिजिटल होती जा रही है, सामाजिक मीडिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और ओपन‑सोर्स तकनीकों ने लोकतांत्रिक संस्थानों की कार्यकुशलता बढ़ाई है, लेकिन इनका गलत उपयोग कभी‑कभी लोकतांत्रिक मूल्यों को चुनौती भी दे सकता है। ऐसे मुद्दों पर भी सम्मेलन में चर्चा होने वाली है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कहा कि AI और सोशल मीडिया ने लोकतंत्र को नई क्षमता दी है लेकिन इसके नियमों और नैतिकता पर काम करना आवश्यक है ताकि लोकतांत्रिक संस्थान और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बन सकें।
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