ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का नया प्रदेश अध्यक्ष जल्द ही घोषित होने वाला है। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अगले एक-दो दिनों में लखनऊ पहुंचेंगे और उनके आने के बाद प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। चुनाव के बाद नए प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान किया जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया
प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए आवश्यक प्रांतीय परिषद के सदस्य पहले ही चुन लिए गए हैं। ये सदस्य हर विधानसभा से चुने जाते हैं। उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा हैं, जिनमें से भाजपा ने 327 सदस्यों को प्रांतीय परिषद के लिए चुना है। प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में केवल प्रांतीय परिषद के सदस्य ही वोट डाल सकते हैं।
यूपी में भाजपा के 98 संघात्मक जिले हैं, जिनमें से अभी तक 84 जिलों के संगठन चुनाव संपन्न हो चुके हैं। इसी आधार पर प्रांतीय परिषद के सदस्य चुने गए हैं और इनमें से ही प्रस्तावक और प्रत्याशी तय होंगे।
पीयूष गोयल को बनाया चुनाव अधिकारी
भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को सुचारू रूप से कराने के लिए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को उत्तर प्रदेश का चुनाव अधिकारी नियुक्त किया है। उनके लखनऊ आगमन के बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और इसके तुरंत बाद नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, यह घोषणा 14 दिसंबर से पहले हो सकती है।
भूपेंद्र चौधरी का कार्यकाल खत्म
अभी उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी हैं, लेकिन उनका कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है। उनके कार्यकाल के बाद प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई नामों की चर्चा शुरू हो गई है। चर्चा में पिछड़ी जाति, एससी समुदाय और ब्राह्मण जाति के नेता भी शामिल हैं।
प्रदेश अध्यक्ष पद की रेस में प्रमुख नाम
प्रदेश अध्यक्ष के लिए वर्तमान में जिन नामों की चर्चा है, उनमें शामिल हैं:
• स्वतंत्र देव सिंह
• धर्मपाल सिंह
• बी.एल. वर्मा
• विद्यासागर सोनकर
• हरिश द्विवेदी
• गोविंद नारायण शुक्ला
• दिनेश शर्मा
सूत्रों का कहना है कि जातिगत समीकरण और संगठन की मजबूती को ध्यान में रखते हुए पार्टी नेतृत्व जल्द ही निर्णय ले सकता है।
उत्तर प्रदेश भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा पार्टी के लिए महत्वपूर्ण कदम है। आगामी चुनावों और संगठन के मजबूत होने के लिए यह पद काफी अहम माना जाता है। पीयूष गोयल की निगरानी में चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होने की उम्मीद है। प्रदेश अध्यक्ष के चयन से न केवल संगठन को नई दिशा मिलेगी, बल्कि आगामी चुनावों में रणनीति तय करने में भी मदद मिलेगी।
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