ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे में कथित गबन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हैं। इसी सिलसिले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से सोमवार को तीन घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई। वहीं, इस मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
चंपत राय से तीन घंटे से ज्यादा पूछताछ
जांच अधिकारियों ने चंपत राय से मंदिर के चंदे के प्रबंधन और कथित अनियमितताओं को लेकर कई सवाल पूछे। पूछताछ के दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगे किसी भी तरह के आरोप से इनकार किया। उनका कहना था कि चंदे के कथित गबन में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि मंदिर के चढ़ावे की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारी इस तरह की हरकत कर सकते हैं। जांच एजेंसियां अब उनके बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।
ट्रस्ट के अन्य सदस्यों को भी नोटिस
मामले की जांच केवल चंपत राय तक सीमित नहीं है। पुलिस ने ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा और गोपाल राव को भी पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। वहीं, 6 जुलाई को ट्रस्ट की अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसमें चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
कैसे सामने आया मामला?
यह पूरा मामला तब सामने आया जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए नकद और कीमती सामान के हिसाब-किताब में कथित गड़बड़ी की शिकायत मिली। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं।
अदालत ने बढ़ाई न्यायिक हिरासत
सोमवार को सभी आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्पेशल एंटी करप्शन कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस ने उनकी आगे की रिमांड नहीं मांगी, जिसके बाद अदालत ने सभी आठ आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इससे पहले आरोपियों को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, जिसकी अवधि पूरी होने के बाद यह नया आदेश जारी किया गया।
वकीलों ने लिया बड़ा फैसला
इस मामले में फैजाबाद बार एसोसिएशन ने भी कड़ा रुख अपनाया है। एसोसिएशन की बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि कोई भी वकील राम मंदिर चंदा गबन मामले के आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा। बार एसोसिएशन ने यह भी निर्णय लिया कि यदि कोई वकील आरोपियों की ओर से अदालत में पेश होना चाहता है, तो उसे पहले आवेदन देना होगा और प्रति आरोपी पांच लाख रुपये एसोसिएशन में जमा करने होंगे। इस राशि का उपयोग मामले की कानूनी प्रक्रिया में किया जाएगा।
बैठक में कुछ वकीलों ने यह मांग भी उठाई कि ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव अयोध्या छोड़ दें। हालांकि यह बार एसोसिएशन की मांग है और इस संबंध में किसी सरकारी आदेश की घोषणा नहीं हुई है।
जांच पर सभी की नजर
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां सभी तथ्यों की जांच कर रही हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। तब तक मामले से जुड़े सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और दोष तय होना अभी बाकी है।
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