ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
विश्व वृद्ध दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज और परिवारों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने बुजुर्गों के प्रति बदलते व्यवहार और परिवारों में बढ़ती दूरियों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज कई घर सूने होते जा रहे हैं, जबकि वृद्धाश्रमों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों के लिए भी एक गंभीर चुनौती है।
परिवारों में बढ़ रही दूरियां
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय समाज की सबसे बड़ी ताकत परिवार व्यवस्था रही है। यहां माता-पिता और बुजुर्गों को सम्मान देने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन आधुनिक जीवनशैली, व्यस्त दिनचर्या और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के कारण कई परिवारों में बुजुर्ग अकेले पड़ते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को पालने-पोसने और उनका भविष्य बनाने के लिए पूरा जीवन समर्पित कर देते हैं। ऐसे में बुढ़ापे में उन्हें सम्मान, प्यार और साथ मिलना चाहिए। लेकिन जब बुजुर्गों को अपने ही घर में उपेक्षा का सामना करना पड़ता है, तो यह बेहद दुखद स्थिति होती है।
बढ़ते वृद्धाश्रमों पर जताई चिंता
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और समाज में वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या एक गंभीर सामाजिक संकेत है। पहले संयुक्त परिवारों की परंपरा मजबूत थी, जहां बुजुर्ग परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते थे। लेकिन अब कई बुजुर्ग अकेले रहने को मजबूर हैं या वृद्धाश्रमों का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को "हृदय विदारक" बताते हुए कहा कि यदि परिवार अपने बुजुर्गों की देखभाल नहीं कर पाएंगे, तो समाज की मूल भावना कमजोर पड़ जाएगी। परिवार केवल एक संस्था नहीं बल्कि भावनात्मक सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार होता है।
बुजुर्गों का सम्मान हमारी जिम्मेदारी
योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से अपील की कि वे अपने माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का अनुभव समाज की अमूल्य धरोहर है। उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद से ही परिवार और समाज मजबूत बनता है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बुजुर्गों को केवल आर्थिक सहायता की नहीं, बल्कि भावनात्मक सहयोग और अपनापन भी चाहिए। उनके साथ समय बिताना, उनकी बात सुनना और उनकी जरूरतों का ध्यान रखना हर परिवार की जिम्मेदारी है।
भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र
भारत की संस्कृति में माता-पिता को भगवान के समान माना गया है। "मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः" का संदेश हमारी परंपरा का अभिन्न हिस्सा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें इस विरासत को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढ़ियां भी परिवार और संस्कारों के महत्व को समझ सकें।
विश्व वृद्ध दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश केवल एक अपील नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है। बढ़ते वृद्धाश्रम और अकेले पड़ते बुजुर्ग हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि कहीं आधुनिकता की दौड़ में हम अपने सबसे महत्वपूर्ण रिश्तों को तो नहीं खो रहे। समय की मांग है कि हम अपने बुजुर्गों को सम्मान, सुरक्षा और अपनापन दें, ताकि हर घर खुशियों और संस्कारों से भरा रहे।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!