ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में अगले विधानसभा चुनाव से पहले एक नया समीकरण बनता दिखाई दे रहा है। करणी सेना ने ऐलान किया है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में 50 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। यह घोषणा करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू ने शाहजहांपुर में आयोजित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान की। सूरजपाल अम्मू के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब तक खुद को एक सामाजिक संगठन के रूप में प्रस्तुत करने वाली करणी सेना के इस कदम को राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश माना जा रहा है।
शाहजहांपुर में किया बड़ा ऐलान
शाहजहांपुर में आयोजित बैठक में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सूरजपाल सिंह अम्मू ने कहा कि करणी सेना अब किसी भी राजनीतिक दल की गुलाम नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन अपने दम पर चुनाव लड़ने में सक्षम है और प्रदेश की 50 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा। अम्मू ने कहा कि करणी सेना के साथ सिर्फ एक जाति या समुदाय नहीं, बल्कि सभी वर्गों के लोग जुड़े हुए हैं। ऐसे में संगठन को राजनीति में अपनी भागीदारी दर्ज कराने का पूरा अधिकार है।
बीजेपी पर भी साधा निशाना
अपने संबोधन के दौरान करणी सेना प्रमुख ने भारतीय जनता पार्टी पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब विभिन्न क्षेत्रीय दलों और छोटे संगठनों को चुनाव में सीटें दी जा सकती हैं और उनके नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है, तो करणी सेना चुनाव क्यों नहीं लड़ सकती। हालांकि उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सम्मान करने की बात भी कही, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि सम्मान का मतलब राजनीतिक अधीनता नहीं है।
UCC और गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग
सूरजपाल अम्मू ने बैठक में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में इस दिशा में कदम उठाए जा चुके हैं, इसलिए उत्तर प्रदेश में भी इसे लागू किया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग दोहराई। अम्मू ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसे विशेष दर्जा मिलना चाहिए।
कार्यकर्ताओं को संगठन मजबूत करने का संदेश
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में अम्मू ने कार्यकर्ताओं को संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में संगठन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रदेश के डीजीपी से मांग की कि करणी सेना के कार्यकर्ताओं को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
राजनीतिक महत्व बढ़ाने की कोशिश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि करणी सेना का यह फैसला संगठन के राजनीतिक विस्तार की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। यदि संगठन वास्तव में 50 सीटों पर उम्मीदवार उतारता है, तो कुछ क्षेत्रों में चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल इस घोषणा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि करणी सेना अपने इस ऐलान को किस तरह जमीन पर उतारती है और इसका प्रदेश की राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ता है।
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