ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयान अक्सर सुर्खियां बनते हैं, लेकिन कुछ बयान ऐसे होते हैं जो सिर्फ एक दिन की चर्चा नहीं, बल्कि लंबे समय तक बहस का विषय बने रहते हैं. ऐसा ही एक बयान ओम प्रकाश राजभर ने महराजगंज में सामाजिक समरसता महारैली के दौरान दिया, जब उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में उत्तर प्रदेश का बंटवारा हुआ तो राजभर का बेटा पूर्वांचल का मुख्यमंत्री होगा.
बयान के पीछे का राजनीतिक संदेश
राजभर का यह बयान सिर्फ एक पारिवारिक दावा नहीं माना जा रहा. इसमें पूर्वांचल की राजनीति, क्षेत्रीय पहचान और अपनी पार्टी के बढ़ते जनाधार का संदेश भी छिपा हुआ है. उन्होंने रैली में कहा कि उनकी पार्टी तेजी से आगे बढ़ रही है और आने वाले समय में उसका असर और बड़ा होगा.
उन्होंने अपनी बात को कांशीराम की राजनीति से भी जोड़ा. राजभर ने कहा कि आज वह जो कुछ बोल पा रहे हैं, वह बहुजन आंदोलन के नेता कांशीराम की देन है, जिन्होंने शोषितों, दलितों और पिछड़े समाज को जागरूक किया. उनके मुताबिक इसी जागरूकता का असर था कि मुलायम सिंह यादव और मायावती जैसे नेता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन पाए.
सपा और बसपा पर सीधा हमला
रैली के दौरान राजभर ने सिर्फ अपनी बात नहीं रखी, बल्कि सपा और बसपा पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख को 2027 में सत्ता में आने का सपना छोड़ देना चाहिए, क्योंकि सपा सरकार में ही कांशीराम नगर का नाम बदलकर कासगंज कर दिया गया था. उन्होंने यह भी कहा कि जब कांशीराम अपनी पार्टी खड़ी कर रहे थे, उस समय अखिलेश यादव विदेश में पढ़ाई कर रहे थे.
बसपा को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी की और कहा कि मायावती के शासनकाल में अधिकारी हनुमान चालीसा पढ़ते थे. यह बयान सीधे तौर पर बसपा के पुराने शासन और मौजूदा राजनीतिक समीकरणों पर टिप्पणी माना जा रहा है.
संख्या, भागीदारी और बहुजन राजनीति
राजभर ने कांशीराम के पुराने नारे “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी भागीदारी” का जिक्र करते हुए कहा कि यह सपना अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है. उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ही इस सोच को असल जमीन पर उतार सकती है. यह लाइन साफ बताती है कि वह खुद को सिर्फ एक सहयोगी दल के नेता के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व की राजनीति के बड़े चेहरे के रूप में स्थापित करना चाहते हैं.
महिलाओं और गरीबों को लेकर भी कही बड़ी बात
रैली में राजभर ने महिला आरक्षण का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि आरक्षण लागू होने के बाद हर 100 सांसद और विधायकों में 33 महिलाएं होंगी, इसलिए महिलाओं को राजनीति में आगे आना चाहिए और अपने अधिकारों के लिए रानी लक्ष्मीबाई की तरह लड़ना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी जाति, धर्म या पार्टी का हो, अगर मदद के लिए उनके पास आएगा तो वह उसकी हरसंभव मदद करेंगे.
सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने दावा किया कि 2017 के बाद उन्होंने बच्चों की ड्रेस बदलने और मुफ्त किताबों की मांग कैबिनेट और विधानसभा में उठाई थी, जिसके बाद बदलाव हुआ.
राजभर का पूरा भाषण यह दिखाता है कि वह सिर्फ गठबंधन की राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहते. वह पूर्वांचल, बहुजन समाज, महिला भागीदारी और अपने राजनीतिक कद—इन सबको एक साथ जोड़कर बड़ा संदेश देना चाहते हैं. आने वाले दिनों में उनका यह बयान सिर्फ सुर्खी नहीं रहेगा, बल्कि यूपी की सियासत में बार-बार याद किया जाएगा.
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