ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी स्वर्गीय शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या का एक वीडियो सामने आने के बाद सियासत गरमा गई है। शुभम की पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मौत हो गई थी। अब उनकी पत्नी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की कोशिश की, लेकिन कई महीनों से उन्हें समय नहीं मिल पाया। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है।
अखिलेश यादव ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए कहा कि एक पीड़ित महिला की बात सुनने का समय मुख्यमंत्री के पास नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही भाजपा का “महिला सम्मान” है?
सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि यह बेहद निंदनीय है कि एक ऐसी महिला, जिसने अपने पति को आतंकी हमले में खो दिया, उसे न्याय और सहानुभूति के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के पास चुनाव प्रचार के लिए समय है, लेकिन अपने राज्य की एक पीड़ित बेटी के लिए नहीं।
व्यवहार को बताया ‘निर्दयी’
सपा प्रमुख ने मुख्यमंत्री के रवैये को ‘निर्दयी’ बताते हुए कहा कि इस तरह का व्यवहार किसी भी संवेदनशील समाज के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा के समर्थक भी इस मामले में असहज महसूस कर रहे होंगे, खासकर महिला कार्यकर्ताओं को यह रवैया जरूर खल रहा होगा।
सरकार से की गई मांगें
अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर कुछ अहम मांगें भी रखीं। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय शुभम द्विवेदी को शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए। साथ ही उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग भी की। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मौजूदा सरकार इन मांगों को पूरा नहीं करती है, तो उनकी सरकार आने पर ये मांगें पूरी की जाएंगी।
भावनात्मक और राजनीतिक मुद्दा
यह मामला अब सिर्फ एक पीड़ित परिवार की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह भावनात्मक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। एक तरफ जहां परिवार न्याय और सम्मान की उम्मीद कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को सरकार की संवेदनहीनता से जोड़कर देख रहा है।
इस पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पीड़ितों की आवाज़ सरकार तक सही तरीके से पहुंच रही है? साथ ही यह भी देखने वाली बात होगी कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है
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