ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले में बड़ा कदम उठाया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर पुलिस ने 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद की गई है। मुख्यमंत्री ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और यदि कोई भी दोषी पाया गया तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। इसी के बाद SIT ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया।
किन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR?
एफआईआर ट्रस्ट के सदस्य और पूर्व भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज की गई है। पुलिस ने इस मामले में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, लवकुश मिश्र, रमा शंकर मिश्र और सुभाष श्रीवास्तव को नामजद किया है। इनमें से छह लोग चढ़ावे की गिनती करने वाली टीम से जुड़े कैशियर बताए जा रहे हैं। वहीं सुभाष श्रीवास्तव और टिन्नू यादव को गिनती प्रक्रिया का प्रभारी माना गया है। टिन्नू यादव का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्हें ट्रस्ट महासचिव चंपत राय का ड्राइवर बताया जाता है।
चंपत राय और ट्रस्ट सदस्यों का नाम FIR में नहीं
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि एफआईआर में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा, गोपाल राव या ट्रस्ट के किसी अन्य सदस्य का नाम शामिल नहीं है। फिलहाल कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ हुई है जो कथित रूप से चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े थे।
CCTV फुटेज भी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों को कथित अनियमितताओं से जुड़े कुछ CCTV फुटेज भी मिले हैं। इन्हीं शुरुआती सबूतों के आधार पर पुलिस ने गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और यदि आगे किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें आपराधिक साजिश (धारा 61), कर्मचारी द्वारा संपत्ति की चोरी (धारा 306), आपराधिक विश्वासघात (धारा 316), चोरी की संपत्ति रखने और उसके लेन-देन से जुड़ी धाराएं 317, 317(4) और 317(5) शामिल हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धाराएं भी लगाई गई हैं।
अब आगे क्या होगा?
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस अब सभी आरोपियों से पूछताछ करेगी और उपलब्ध दस्तावेजों, CCTV फुटेज तथा अन्य सबूतों की जांच करेगी। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
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