ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। इन फैसलों का असर राज्य के आम लोगों, ग्रामीण क्षेत्रों और सरकारी कर्मचारियों पर सीधे तौर पर पड़ेगा। सरकार ने प्रॉपर्टी रजिस्ट्री प्रक्रिया को सख्त बनाने, गांवों तक बस सेवा पहुंचाने और सरकारी कर्मचारियों के निवेश व संपत्ति की जानकारी अनिवार्य करने जैसे कदम उठाए हैं। इन फैसलों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और जनता को बेहतर सुविधाएं देना है।
प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के नियम हुए सख्त
कैबिनेट बैठक में सबसे बड़ा फैसला प्रॉपर्टी रजिस्ट्री को लेकर लिया गया है। स्टांप एवं पंजीयन विभाग के मंत्री ने बताया कि अब किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले विक्रेता को यह साबित करना होगा कि वह उस जमीन या मकान का असली मालिक है।
इसके लिए रजिस्ट्री से पहले विक्रेता के नाम का मिलान ‘खतौनी’ यानी राजस्व रिकॉर्ड से किया जाएगा। जब तक खतौनी में दर्ज नाम से पुष्टि नहीं होगी, तब तक स्टाम्प पेपर जारी नहीं किया जाएगा। पहले केवल आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र के आधार पर स्टाम्प पेपर मिल जाता था, जिससे कई बार फर्जी रजिस्ट्री और जमीन घोटाले की शिकायतें सामने आती थीं। सरकार का कहना है कि इस नए नियम से धोखाधड़ी पर रोक लगेगी और किसी और की जमीन बेचना लगभग असंभव हो जाएगा।
सीएम ग्राम परिवहन योजना को मिली मंजूरी
कैबिनेट बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने सीएम ग्राम परिवहन योजना को मंजूरी दे दी है। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत प्रदेश की 59,163 ग्राम सभाओं को बस सेवा से जोड़ा जाएगा।
सरकार की योजना है कि हर गांव में दिन में कम से कम दो बार बस सेवा उपलब्ध हो। इससे गांवों को सीधे ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय से जोड़ा जा सकेगा। इस योजना से ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी कामों के लिए शहरों तक आने-जाने में काफी सुविधा मिलेगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और व्यापार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
ओला और उबर पर भी सख्ती
परिवहन विभाग ने ओला और उबर जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों के लिए भी नए नियम लागू किए हैं। अब इन कंपनियों को उत्तर प्रदेश में अपना अनिवार्य पंजीकरण कराना होगा। बिना राज्य में रजिस्ट्रेशन कराए ये कंपनियां यूपी की सीमाओं में सेवाएं नहीं दे सकेंगी। सरकार का कहना है कि इससे परिवहन सेवाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ेगी।
सरकारी कर्मचारियों के निवेश पर निगरानी
कैबिनेट में सरकारी कर्मचारियों के लिए भी नए नियम तय किए गए हैं। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अब सभी सरकारी कर्मचारियों को हर साल अपनी अचल संपत्ति की जानकारी सरकार को देनी होगी।
इसके अलावा यदि कोई कर्मचारी अपने छह महीने के मूल वेतन से अधिक राशि शेयर बाजार या किसी अन्य माध्यम में निवेश करता है, तो इसकी जानकारी भी सरकार को देनी होगी। सरकार का मानना है कि इस नियम से प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।
कांशीराम आवास योजना में सुधार
आवास के क्षेत्र में भी सरकार ने अहम फैसला लिया है। कांशीराम आवास योजना की इमारतों की रंगाई-पुताई कराई जाएगी और इन आवासों को दलितों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। जो लोग अवैध रूप से इन मकानों में रह रहे हैं, उन्हें वहां से हटाया जाएगा।
अयोध्या में बनेगा स्पोर्ट्स कॉलेज
खेलों को बढ़ावा देने के लिए अयोध्या में स्पोर्ट्स कॉलेज बनाने की भी योजना है। इसके लिए सरकार ने 2500 वर्ग मीटर जमीन देने का फैसला किया है। इस कदम से राज्य में खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
इन फैसलों के जरिए सरकार का लक्ष्य प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाना, ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत करना और युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करना है।
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