ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से तेज होती दिखाई दे रही हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) अब अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण से आगे बढ़ते हुए ब्राह्मण समाज को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी सिलसिले में बुधवार को लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में ब्राह्मण समाज के प्रमुख नेताओं, विधायकों, पूर्व विधायकों, सांसदों और पूर्व सांसदों की अहम बैठक आयोजित की गई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 5 अगस्त को पूर्व केंद्रीय मंत्री और समाजवादी विचारक जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित होने वाले विशाल ब्राह्मण सम्मेलन की तैयारियों को अंतिम रूप देना था।
ब्राह्मण सम्मेलन को बनाएगी शक्ति प्रदर्शन का मंच
जानकारी के अनुसार, समाजवादी पार्टी इस कार्यक्रम को सिर्फ श्रद्धांजलि सभा तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे ब्राह्मण समाज के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के बड़े अभियान के रूप में देख रही है। इसके लिए प्रदेशभर में अलग-अलग टीमों का गठन किया जाएगा, जो ब्राह्मण समाज के लोगों से संपर्क करेंगी और उन्हें 5 अगस्त को लखनऊ पहुंचने के लिए प्रेरित करेंगी। पार्टी का लक्ष्य बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
अखिलेश यादव की निगरानी में हुई बैठक
बैठक की पूरी रणनीति पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की नजर रही। इस अभियान की जिम्मेदारी बलिया से सांसद सनातन पांडे को सौंपी गई है। बैठक में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे, विधायक अमिताभ बाजपेई, विनय तिवारी, बैजनाथ दुबे, संतोष पांडे, पूजा शुक्ला और पूर्व विधायक आशुतोष उपाध्याय समेत कई वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
जिला और मंडल स्तर पर भी होंगे कार्यक्रम
बैठक में फैसला लिया गया कि जनेश्वर मिश्र जयंती को जिला और मंडल स्तर पर भी बड़े पैमाने पर मनाया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों में बैठकें आयोजित की जाएंगी और पार्टी नेताओं की जिम्मेदारियां जल्द तय की जाएंगी। सपा नेताओं का मानना है कि यह अभियान 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मण समाज के साथ संगठनात्मक और वैचारिक संवाद को मजबूत करने का बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
कई राजनीतिक मुद्दों पर भी हुई चर्चा
बैठक के दौरान प्रदेश की कानून-व्यवस्था और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा की गई। पार्टी नेताओं ने कथित एनकाउंटर, शंकराचार्य विवाद, साधुओं के साथ मारपीट, राम मंदिर चढ़ावा विवाद और जातीय मुद्दों जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया। सूत्रों के अनुसार, जिला इकाइयों से जातिवार एनकाउंटर से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है। इन मुद्दों को लेकर सपा से जुड़े ब्राह्मण नेता समाज के बीच संवाद करेंगे और पार्टी की नीतियों से लोगों को अवगत कराएंगे।
2027 चुनाव पर सपा की नजर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में जातीय समीकरण हमेशा चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी का यह अभियान ब्राह्मण समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक अहम राजनीतिक प्रयास माना जा रहा है। हालांकि, इस रणनीति का चुनावी असर कितना होगा, इसका जवाब आने वाले समय और 2027 विधानसभा चुनाव के नतीजे ही देंगे। फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरणों को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!