ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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राजधानी दिल्ली में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की तीन दिवसीय हड़ताल के बीच आम लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ऑटो, टैक्सी और टूरिस्ट वाहन संगठनों ने इस हड़ताल से खुद को अलग कर लिया है। इस फैसले के बाद दिल्ली में ऑटो और टैक्सी सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी और यात्रियों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
‘यह आंदोलन सिर्फ ट्रक ऑपरेटरों का’
दिल्ली टैक्सी टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने साफ कहा कि यह आंदोलन केवल ट्रकों और व्यावसायिक मालवाहक वाहनों से जुड़ा है।उन्होंने कहा कि ऑटो और टैक्सी चालक इस आंदोलन का हिस्सा नहीं हैं और वे लगातार लोगों की सेवा करते रहेंगे।
कई यूनियनों ने किया समर्थन से इनकार
दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ, दिल्ली प्रदेश टैक्सी यूनियन, ऑटो ड्राइवर्स वेलफेयर संघ दिल्ली, प्रगतिशील ऑटो रिक्शा ड्राइवर्स यूनियन और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ऑटो टैक्सी ट्रांसपोर्ट यूनियन जैसी कई बड़ी यूनियनों ने भी खुद को इस हड़ताल से अलग कर लिया है। इन यूनियनों का कहना है कि मालवाहक वाहनों की मांगें अलग हैं और ऑटो-टैक्सी चालकों का उनसे कोई सीधा संबंध नहीं है।
रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर सेवा जारी
ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने कहा कि दिल्ली के रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सेवाएं पहले की तरह चलती रहेंगी। इससे लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी, खासकर उन लोगों को जो रोजाना सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहते हैं। हालांकि यूनियनों ने हड़ताल से दूरी बनाई है, लेकिन उन्होंने सीएनजी की बढ़ती कीमतों पर चिंता जरूर जताई है। ऑटो और टैक्सी चालकों का कहना है कि लगातार बढ़ते सीएनजी दामों से उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में दिल्ली सरकार को किराए में बढ़ोतरी पर विचार करना चाहिए।
सरकार से बातचीत की मांग
यूनियन नेताओं ने कहा कि वे सरकार के साथ बैठक कर अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में हड़ताल और धरना-प्रदर्शन की रणनीति बनाई जा सकती है। फिलहाल दिल्ली में ऑटो और टैक्सी सेवाएं सामान्य रहेंगी, जिससे लोगों को राहत मिलेगी। हालांकि सीएनजी कीमतों और किराए को लेकर यूनियनों की नाराजगी बनी हुई है, जो आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बन सकती है।
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