ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अब बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की तैयारी शुरू हो गई है। दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी स्कूलों का स्ट्रक्चरल ऑडिट शुरू कर दिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत स्कूलों का ‘हेल्थ कार्ड’ तैयार किया जाएगा, जिससे हर स्कूल की वास्तविक स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड बनाया जा सके। शिक्षा विभाग के मुताबिक अब तक करीब 360 स्कूलों का ऑडिट पूरा किया जा चुका है और जून 2026 तक एक हजार से ज्यादा सरकारी स्कूलों का सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
ड्रोन मैपिंग से होगी पूरी जांच
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि स्कूलों की जांच के लिए ड्रोन मैपिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्रोन के जरिए स्कूल परिसर की 360 डिग्री तस्वीरें ली जा रही हैं। इन तस्वीरों में स्कूल की बिल्डिंग, क्लासरूम, वॉशरूम, सीढ़ियां, छत, दीवारें, बिजली के स्विच बोर्ड, रेलिंग, रैंप और फायर सेफ्टी जैसी सुविधाओं की बारीकी से जांच की जा रही है।
क्या बोले शिक्षा मंत्री?
दिल्ली के शिक्षा मंत्री Ashish Sood ने बताया कि इस ऑडिट का मकसद स्कूलों की असली स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में करीब 1090 सरकारी स्कूल हैं, जिनकी लगभग 800 इमारतें हैं। इस ऑडिट से यह पता चलेगा कि किन स्कूलों में मरम्मत, नए निर्माण या सुरक्षा सुधार की जरूरत है। मंत्री के अनुसार गर्मियों की छुट्टियों के दौरान सभी स्कूलों का ऑडिट पूरा कर लिया जाएगा, ताकि जून के बाद जरूरी निर्माण और मरम्मत का काम शुरू किया जा सके।
क्या-क्या होगा रिपोर्ट में शामिल?
स्कूलों के हेल्थ कार्ड में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। रिपोर्ट में यह बताया जाएगा कि कौन सी चीज अच्छी स्थिति में है और कहां सुधार की जरूरत है।
रिपोर्ट में शामिल होंगे:
• बिल्डिंग और क्लासरूम की स्थिति
• छत, कॉलम, दीवार और सीढ़ियों की मजबूती
• वॉशरूम और पानी की सुविधाएं
• बिजली के तार, स्विच बोर्ड और एमसीबी
• फायर सेफ्टी इंतजाम
• रेलिंग और रैंप की स्थिति
• क्लासरूम में डेस्क, पंखे और फर्नीचर
• लैब, लाइब्रेरी, स्टाफ रूम और ऑडिटोरियम की स्थिति
• डिजिटल लाइब्रेरी और दूसरी सुविधाएं
• बच्चों को मिलेगा सुरक्षित स्कूल
शिक्षा विभाग का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा छात्रों को मिलेगा। जिन स्कूलों में सुरक्षा या इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी खामियां होंगी, वहां तुरंत सुधार कार्य शुरू किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे बच्चों को ज्यादा सुरक्षित, साफ-सुथरा और सुविधाजनक स्कूल वातावरण मिलेगा।
कैसे तैयार होगा डिजिटल रिकॉर्ड?
ड्रोन मैपिंग के जरिए स्कूलों की जो तस्वीरें और डेटा इकट्ठा किया जा रहा है, उसे डिजिटल प्रोफाइल के रूप में सेव किया जाएगा। बाद में मरम्मत और निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उसी रिकॉर्ड को अपडेट भी किया जाएगा। इससे शिक्षा विभाग के पास हर स्कूल की पूरी डिजिटल हिस्ट्री मौजूद रहेगी।
ढाई महीने पहले शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
जानकारी के मुताबिक इस पूरे प्रोजेक्ट का टेंडर करीब ढाई महीने पहले जारी किया गया था। एक एक्सपर्ट एजेंसी और उसकी टीम यह काम कर रही है। अब तक 360 स्कूलों का ऑडिट पूरा हो चुका है और बाकी स्कूलों में तेजी से काम चल रहा है।
शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रोजेक्ट सही तरीके से लागू होता है तो दिल्ली के सरकारी स्कूलों की स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। स्कूलों की डिजिटल मॉनिटरिंग से न सिर्फ सुरक्षा बेहतर होगी, बल्कि भविष्य में रखरखाव और बजट योजना बनाना भी आसान होगा।
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