ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिका में एक बार फिर खतरनाक वायरस को लेकर चिंता बढ़ गई है। हंता वायरस के संपर्क में आए 17 अमेरिकी यात्रियों को नेब्रास्का मेडिकल सेंटर में विशेष निगरानी और क्वारंटीन में रखा गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक इन यात्रियों को 42 दिनों तक मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा ताकि संक्रमण फैलने का खतरा रोका जा सके। यह मामला उस समय सामने आया जब ‘MV होंडियस’ नाम की क्रूज शिप पर यात्रा कर रहे कुछ लोगों में हंता वायरस के लक्षण पाए गए। इसके बाद अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग और CDC तुरंत अलर्ट मोड में आ गए।
कैसे सामने आया मामला?
अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग (HHS) के अनुसार, ये सभी यात्री स्पेन के कैनरी आइलैंड्स से लौटे हैं। वहां क्रूज शिप पर एक यात्री में हंता वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई, जबकि दूसरे यात्री में हल्के लक्षण पाए गए। स्थिति को गंभीर मानते हुए अमेरिकी सरकार ने स्पेशल विमान भेजकर यात्रियों को अमेरिका वापस बुलाया। इसके बाद उन्हें सीधे नेब्रास्का मेडिकल सेंटर की नेशनल क्वारंटीन यूनिट में रखा गया। डॉक्टर अब इन सभी यात्रियों की लगातार जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई और व्यक्ति संक्रमित तो नहीं हुआ।
क्या है हंता वायरस?
हंता वायरस एक खतरनाक संक्रमण है जो मुख्य रूप से चूहों, गिलहरियों और दूसरे कृंतक जानवरों से फैलता है। यह वायरस इन जानवरों के मल, पेशाब और लार में पाया जाता है। अगर कोई व्यक्ति संक्रमित जानवरों के संपर्क में आता है या वायरस वाले कण सांस के जरिए शरीर में चले जाते हैं, तो संक्रमण हो सकता है। इस वायरस का नाम दक्षिण कोरिया की “हंटन” नदी के नाम पर रखा गया था, जहां पहली बार इससे जुड़े मामले सामने आए थे।
कितनी खतरनाक है यह बीमारी?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हंता वायरस बेहद गंभीर संक्रमण बन सकता है। संक्रमित व्यक्ति में शुरुआत में बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हालत बिगड़ने पर फेफड़ों में पानी भर सकता है और किडनी फेल होने का खतरा भी बढ़ जाता है। कई मामलों में मरीज की स्थिति तेजी से गंभीर हो जाती है। WHO के अनुसार, इस वायरस से संक्रमित 35 से 40 प्रतिशत लोगों की मौत छह हफ्तों के भीतर हो सकती है।
लक्षण दिखने में लग सकता है समय
हंता वायरस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके लक्षण तुरंत नहीं दिखाई देते। विशेषज्ञों के मुताबिक, संक्रमण के बाद लक्षण आने में 1 से 8 हफ्ते तक लग सकते हैं। इसी वजह से संक्रमित व्यक्ति को लंबे समय तक निगरानी में रखा जाता है। अमेरिका में भी CDC ने इन यात्रियों के लिए 42 दिनों की मॉनिटरिंग तय की है।
क्या इंसान से इंसान में फैलता है?
आमतौर पर हंता वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है, लेकिन इसकी “एंडीज” नाम की एक विशेष किस्म इंसान से इंसान में भी फैल सकती है। WHO के मुताबिक, संक्रमित व्यक्ति की लार, थूक, साथ खाना खाने या एक ही बिस्तर पर सोने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। मरीज की देखभाल करने वालों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस कोविड-19 की तरह तेजी से नहीं फैलता।
अभी तक नहीं है कोई वैक्सीन
हंता वायरस का फिलहाल कोई निश्चित इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों के आधार पर इलाज करते हैं। अगर मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है तो ऑक्सीजन या वेंटिलेटर सपोर्ट दिया जाता है। साथ ही शरीर में पानी और ब्लड प्रेशर संतुलित रखने के लिए दवाएं और फ्लूइड दिए जाते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दी पहचान और समय पर इलाज से जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
नेब्रास्का मेडिकल सेंटर क्यों खास है?
जहां इन यात्रियों को रखा गया है, वह नेब्रास्का मेडिकल सेंटर अमेरिका की सबसे विशेष क्वारंटीन सुविधाओं में से एक माना जाता है। यह अमेरिका की इकलौती फेडरल फंडेड नेशनल क्वारंटीन यूनिट है। यहां खास नेगेटिव एयर प्रेशर सिस्टम वाले कमरे हैं, जिससे वायरस हवा में फैल नहीं पाता। डॉक्टर माइकल वाडमैन के मुताबिक, यात्रियों को होटल जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्हें कमरे में खाना, हल्की एक्सरसाइज और नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिल रही है।
भारत में भी मिल चुके हैं मामले
हंता वायरस के मामले भारत में भी सामने आ चुके हैं। 2007 में आंध्र प्रदेश में एक व्यक्ति में संक्रमण पाया गया था। इसके बाद 2008 में चूहे और सांप पकड़ने वाले कई लोगों में संक्रमण मिला। सबसे चर्चित मामला 2016 में मुंबई में सामने आया था, जहां एक महिला की मौत हंता वायरस संक्रमण से हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में यह वायरस बहुत आम नहीं है, लेकिन चूहों और संक्रमित जानवरों से बचाव बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट पर
CDC और अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग लगातार यात्रियों की निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच के बाद कुछ लोगों को घर भेजा जा सकता है, लेकिन उनकी निगरानी जारी रहेगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी को तेज बुखार, कमजोरी, सांस लेने में दिक्कत या शरीर दर्द जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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