ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच पाकिस्तान को लेकर आई एक रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने अमेरिकी हवाई हमलों से बचाने के लिए ईरानी विमानों को अपने एयरफील्ड्स पर पार्क करने की अनुमति दी थी। इस खबर के सामने आने के बाद अमेरिका में भी नाराजगी बढ़ गई है। खासतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी नेताओं ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
ट्रंप ने ईरान के सीजफायर प्रस्ताव को बताया ‘बेवकूफी’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से दिए गए नए सीजफायर प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान इस तरह के प्रस्ताव देकर अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका इस संघर्ष में पूरी तरह जीत हासिल करेगा और ईरान को पीछे हटना पड़ेगा। ट्रंप के बयान के बाद अमेरिका-ईरान संबंध और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।
रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
अमेरिकी मीडिया संस्थान CBS News की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के दौरान ईरानी विमानों को अपने एयरफील्ड्स पर खड़ा करने की अनुमति दी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए ईरान ने अपने कुछ सैन्य और खुफिया विमानों को पाकिस्तान भेजा। इतना ही नहीं, ईरान ने अपने कुछ नागरिक विमानों को अफगानिस्तान में भी पार्क किया था ताकि वे संभावित हमलों से सुरक्षित रह सकें।
नूर खान एयरबेस का नाम आया सामने
रिपोर्ट में दावा किया गया कि अप्रैल में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सीजफायर की घोषणा के तुरंत बाद ईरान ने अपने कई विमान पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर भेजे थे। इनमें एक टोही और खुफिया विमान भी शामिल बताया गया है। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से इन दावों को खारिज कर दिया गया है। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि नूर खान एयरबेस शहर के बीचोंबीच स्थित है और वहां किसी बड़े विमान बेड़े को छिपाना संभव नहीं है।
ट्रंप के करीबी नेता भड़के
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिकी सीनेटर और ट्रंप के करीबी माने जाने वाले लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर नाराजगी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर यह रिपोर्ट सही साबित होती है तो अमेरिका को ईरान और अन्य देशों के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर दोबारा विचार करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल को लेकर पाकिस्तानी अधिकारियों के पुराने बयानों को देखते हुए उन्हें इस रिपोर्ट पर आश्चर्य नहीं होगा।
बढ़ सकता है अमेरिका-पाकिस्तान तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह रिपोर्ट सही साबित होती है तो अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है। पहले ही अमेरिका कई बार पाकिस्तान की दोहरी नीति पर सवाल उठाता रहा है। अब ईरान से जुड़े इस नए विवाद ने पाकिस्तान की विदेश नीति और उसकी भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अमेरिका की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।
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