ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दुनिया की ताकत अब केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं रह गई है। तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में अब क्रिटिकल मिनरल्स यानी महत्वपूर्ण खनिजों की अहमियत लगातार बढ़ रही है। इसी दिशा में अमेरिका ने भारत समेत 54 देशों के साथ मिलकर एक नए अंतरराष्ट्रीय खनिज समूह बनाने की पहल की है। इसका मुख्य उद्देश्य चीन के उस दबदबे को कम करना है, जो फिलहाल रेयर अर्थ और अन्य जरूरी खनिजों की वैश्विक सप्लाई पर लगभग 90 प्रतिशत तक काबिज है।
वाशिंगटन बैठक में हुआ बड़ा ऐलान
इस नई पहल की घोषणा वाशिंगटन में आयोजित 2026 क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल बैठक में की गई। इस बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट समेत कई बड़े नेता शामिल हुए। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि भारत इस वैश्विक गठबंधन में अहम भूमिका निभाने जा रहा है। यह कदम भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका को भी दर्शाता है।
दो नए मंच बनाए गए
इस पहल के तहत दो बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच तैयार किए गए हैं। पहला मंच FORGE है, जो पहले के मिनरल्स सिक्योरिटी पार्टनरशिप की जगह लेगा। इसका मुख्य लक्ष्य खनिजों की कीमत और सप्लाई को स्थिर और सुरक्षित बनाए रखना है। फिलहाल इसकी जिम्मेदारी दक्षिण कोरिया को दी गई है।
दूसरा मंच Pax Silica है, जो सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी खनिजों की सप्लाई को चीन से हटाकर भरोसेमंद देशों तक पहुंचाने पर काम करेगा। इस मंच में भारत को एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार माना जा रहा है।
भारत के लिए सुनहरा अवसर
यह पहल भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। अब तक भारत मुख्य रूप से खनिजों का आयात करता रहा है, लेकिन इस नई साझेदारी के बाद भारत खनिजों को प्रोसेस और रिफाइन करने का वैश्विक केंद्र बन सकता है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह चीन की जगह भारत जैसे देशों में खनिज खनन और रिफाइनिंग के क्षेत्र में करीब 30 अरब डॉलर का निवेश करेगा। इससे भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश की तकनीकी क्षमता भी मजबूत होगी।
टैरिफ में कटौती से बढ़ेगा व्यापार
अमेरिका ने हाल ही में भारतीय उत्पादों पर लगने वाला टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इससे भारत में बने बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर से जुड़े उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। यह फैसला भारतीय उद्योगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है और इससे भारत की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
Project Vault से बनेगा रणनीतिक भंडार
अमेरिका ने Project Vault नाम की एक नई योजना भी शुरू की है। इसके तहत रणनीतिक खनिजों का विशेष भंडार तैयार किया जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में फैक्ट्रियों का उत्पादन प्रभावित न हो। यह योजना भविष्य की औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।
भविष्य की सुपरपावर तय करेंगे ये खनिज
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वही देश वैश्विक सुपरपावर बनेगा, जिसके पास लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ जैसे महत्वपूर्ण खनिजों पर मजबूत पकड़ होगी। इलेक्ट्रिक वाहनों, मोबाइल फोन, रक्षा उपकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के लिए ये खनिज बेहद जरूरी हैं। ऐसे में भारत के लिए यह साझेदारी भविष्य में आर्थिक और रणनीतिक रूप से बेहद लाभदायक साबित हो सकती है।
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