ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारत और अमेरिका के बीच हुए बड़े ट्रेड डील के ऐलान के बाद अब दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इस समझौते को लेकर जल्द ही दोनों देश मिलकर एक संयुक्त बयान जारी करने वाले हैं, जिसमें डील की पूरी रूपरेखा साफ होगी। माना जा रहा है कि यह बयान अगले चार से पांच दिनों के भीतर जारी किया जा सकता है। इस डील से भारत के कई निर्यात सेक्टरों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
चार से पांच दिनों में जारी होगा संयुक्त बयान
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की पहली किस्त लगभग तैयार हो चुकी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है। संयुक्त बयान जारी होने के बाद आगे की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर मार्च के मध्य तक किए जा सकते हैं।
भारतीय सामान पर टैरिफ में बड़ी कटौती संभव
इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा भारतीय निर्यातकों को मिल सकता है। अमेरिका द्वारा भारतीय सामान पर लगाया गया कुल 50 प्रतिशत टैरिफ घटाकर लगभग 18 प्रतिशत करने की योजना है। इसमें 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ और 25 प्रतिशत पेनल्टी टैरिफ शामिल है, जो रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया था। टैरिफ कम होने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे।
एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से लागू होगा नया नियम
पीयूष गोयल ने बताया कि संयुक्त बयान जारी होने के करीब दो दिन बाद अमेरिका की ओर से एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया जा सकता है। इसी ऑर्डर के बाद नया टैरिफ लागू होगा। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि दोनों देशों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।
इन सेक्टरों को मिलेगा सीधा फायदा
टैरिफ में कटौती का असर खासतौर पर भारत के लेबर-इंटेंसिव सेक्टरों पर पड़ेगा। टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, लेदर प्रोडक्ट्स, जूते-चप्पल, समुद्री उत्पाद और MSME सेक्टर से जुड़े सामान को इससे सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ कम होने से इन सेक्टरों की अमेरिका में मांग बढ़ सकती है और निर्यात में तेजी आ सकती है।
आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि संयुक्त बयान जारी होना अंतरराष्ट्रीय समझौतों में एक सामान्य प्रक्रिया है। इसके बाद डील को कानूनी समझौते का रूप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत में टैरिफ MFN (Most Favoured Nation) सिस्टम के तहत लागू होते हैं, इसलिए भारत की ओर से टैरिफ में कटौती कानूनी समझौते पर हस्ताक्षर के बाद ही होगी। वहीं अमेरिका एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए टैरिफ में बदलाव कर सकता है, इसलिए वहां यह फैसला पहले लागू हो सकता है।
कुल मिलाकर भारत-अमेरिका ट्रेड डील दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है। इससे भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
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