ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर चुनावी व्यवस्था को लेकर दिए गए अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अमेरिकी चुनाव प्रणाली पर सवाल उठाते हुए बड़े बदलाव की मांग की है। ट्रंप का कहना है कि अगर चुनावी व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो देश में राजनीतिक संकट पैदा हो सकता है। उनके इस बयान ने अमेरिका की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
चुनाव प्रणाली पर ट्रंप का बड़ा आरोप
रविवार को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका के चुनाव धांधली और चोरी से प्रभावित हैं। उन्होंने लिखा कि अमेरिकी चुनाव पूरी दुनिया में मजाक का विषय बन चुके हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर चुनाव प्रणाली में जल्द सुधार नहीं किया गया तो देश का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने अपने समर्थकों और रिपब्लिकन सांसदों से चुनाव सुधार के प्रस्तावों का समर्थन करने की अपील भी की।
2020 चुनाव के बाद से लगातार आरोप
डोनाल्ड ट्रंप 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद से लगातार चुनाव में धांधली का आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, कई अदालतों में इन आरोपों की जांच हुई और किसी तरह की चुनावी धोखाधड़ी का ठोस सबूत सामने नहीं आया। इसके बावजूद ट्रंप अपने दावों पर कायम हैं और चुनाव प्रणाली में बदलाव की मांग बार-बार दोहरा रहे हैं। उनका मानना है कि सख्त नियम लागू करने से चुनावों में पारदर्शिता बढ़ेगी और जनता का भरोसा मजबूत होगा।
ट्रंप की चुनाव सुधार से जुड़ी मांगें
ट्रंप ने चुनावी नियमों में कई बदलाव सुझाए हैं। उनकी सबसे बड़ी मांग यह है कि मतदान करने से पहले हर मतदाता के लिए सरकार द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य किया जाए। इसके अलावा उन्होंने वोटर रजिस्ट्रेशन के दौरान अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण देना भी जरूरी करने की बात कही है।
ट्रंप ने पोस्टल वोटिंग यानी डाक के जरिए मतदान पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पोस्टल वोटिंग को सीमित किया जाना चाहिए और इसे केवल बीमारी, विकलांगता, सैन्य सेवा या यात्रा जैसे विशेष मामलों में ही अनुमति दी जानी चाहिए।
इंटरव्यू में भी दोहराया बयान
हाल ही में एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को ऐसे चुनाव चाहिए, जिनमें किसी तरह की धांधली की संभावना न हो। उन्होंने दावा किया कि चुनाव सुधार को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ समर्थकों के बीच भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
ट्रंप के बयान पर उठ रहे सवाल
ट्रंप के इस बयान को लेकर अमेरिका में विरोधाभास भी देखने को मिल रहा है। कई लोगों का मानना है कि यदि चुनावी प्रक्रिया पर ज्यादा संघीय नियंत्रण बढ़ाया गया तो राज्यों और स्थानीय चुनावी संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। अमेरिकी संविधान के अनुसार चुनाव कराने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्यों की होती है, हालांकि कांग्रेस कुछ नियम तय कर सकती है।
अलग-अलग राज्यों में अलग नियम
अमेरिका के कई राज्यों में पहले से ही मतदाता पहचान पत्र दिखाना जरूरी है, लेकिन पहचान पत्र के प्रकार और नियम अलग-अलग हैं। ऐसे में ट्रंप की मांग पूरे देश में एक समान नियम लागू करने की दिशा में देखी जा रही है।
चुनाव सुधार पर जारी बहस
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान ने अमेरिका में चुनाव सुधार को लेकर बहस को और तेज कर दिया है। जहां उनके समर्थक चुनाव प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत बता रहे हैं, वहीं विरोधी इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती मान रहे हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में बड़ा विषय बना रह सकता है।
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