ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के नेता डॉ. संजय निषाद को बुधवार को गाजियाबाद में यूपी गेट पर पुलिस ने मेरठ जाने से रोक दिया। मंत्री सोनू कश्यप हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने के लिए मेरठ जा रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी, जिससे राजनैतिक और सामाजिक तौर पर चर्चा शुरू हो गई है।
क्या हुआ पूरा मामला?
डॉ. संजय निषाद अपने काफिले के साथ मेरठ के सारधना क्षेत्र में मृतक सोनू कश्यप के घर वालों से मिलने के लिए गाजियाबाद से रवाना हुए थे। इसी दौरान गाजियाबाद के यूपी गेट (गाजीपुर बॉर्डर) पर राज्य पुलिस ने उन्हें रोक दिया। मंत्री ने प्रशासन से कई बार रास्ता खोलने की गुज़ारिश की, लेकिन पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और कानून‑व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उन्हें आगे नहीं जाने दिया।
पुलिस ने बताया कि इलाके में शांति‑व्यवस्था को लेकर सुरक्षा व्यवस्था सख्त है, और इसी वजह से मंत्री का काफिला आगे नहीं बढ़ सका। हालांकि संजय निषाद ने इसे अप्रशासनिक रोक बताया और अधिकारियों के साथ बहस भी हुई, लेकिन अंततः उन्हें मेरठ जाने से रोक दिया गया।
मंत्री का रुख और नाराज़गी
संजय निषाद ने इस रोक के बाद अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की। उनका कहना था कि वह एक संवेदनशील मामले — रोहित उर्फ सोनू कश्यप की हत्या — के परिवार से मिलने जा रहे थे और प्रशासन की इस रोक से वह निराश हैं। उनके काफिले और अधिकारियों के बीच थोड़ी देर वैचारिक और वाद‑विवाद की स्थिति भी बनी।
कई समर्थक और कार्यकर्ता भी मौके पर इकट्ठा हो गए और हाईवे पर कुछ समय के लिए नारेबाजी और जाम की स्थिति पैदा कर दी। हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लिया और किसी बड़े संघर्ष को टाल दिया।
सोनू कश्यप हत्याकांड की पृष्ठभूमि
संजय निषाद जिस परिवार से मिलने जा रहे थे, वह सरधना क्षेत्र के ग्राम ज्वालागढ़ में रहने वाले कश्यप समाज के युवक रोहित उर्फ सोनू कश्यप से जुड़े हैं। 5 जनवरी 2026 को हुए इस दुर्घटनाग्रस्त और जानलेवा हमले में रोहित को पहली शराब पिलाई गई, उसके करीब ₹80,000 लूटे गए और फिर उसे ज़िंदा जला दिया गया — एक कुख्यात और जघन्य अपराध जिसकी अभी तक आरोपी गिरफ्त में नहीं आए हैं।
यह खूनी वारदात उत्तर प्रदेश में कानून‑व्यवस्था पर सवाल उठा रही है, और इसी संदर्भ में मंत्री संजय निषाद पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे।
राजनैतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
प्रशासन द्वारा मंत्री को रोक दिए जाने की खबर के बाद राजनैतिक गलियारे में हलचल बढ़ गई है। कुछ लोगों ने प्रशासन के इस कदम को अप्रत्याशित बताया है, जबकि सुरक्षा के दृष्टिकोण से इसे उचित ठहराया गया है। हाईवे पर कार्यकर्ताओं द्वारा लगाया गया जाम भी इस बात का संकेत है कि जनता बीच‑बचाव या संवेदनशील मामलों में राजनीति से प्रेरित भावनाओं को लेकर सतर्क रहती है।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या राजनीतिक स्थलों पर भी कानून‑व्यवस्था की प्राथमिकता में परिवर्तन हो रहा है, या राज्य सरकार के नेताओं को समान सुरक्षा के साथ आवाज़ उठाने का अधिकार होना चाहिए।
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