ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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गाजियाबाद में मंगलवार को हुई जोरदार बारिश ने शहर की रफ्तार पूरी तरह थाम दी। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को आज यानी बुधवार को नर्सरी से लेकर कक्षा 12 तक के सभी स्कूल बंद करने का आदेश देना पड़ा। जिलाधिकारी रविंद्र मांदड़ के निर्देश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी यादव ने सभी बोर्ड और शिक्षण संस्थानों को छुट्टी घोषित करने के निर्देश जारी किए।
4 घंटे की बारिश से शहर डूबा
मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे से शुरू हुई बारिश लगातार शाम 5 बजे तक होती रही। मौसम विभाग के मुताबिक, इस दौरान गाजियाबाद में 110 मिमी बारिश दर्ज की गई। बारिश इतनी तेज थी कि कुछ ही घंटों में सड़कों पर 3 फीट तक पानी भर गया। कविनगर, विजयनगर, लोनी और शहर के वीआईपी इलाकों में जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
कलेक्ट्रेट परिसर तक पानी में डूब गया। देर रात तक वहां एक फीट से ज्यादा पानी जमा रहा। कई इलाकों में सड़कें तालाब जैसी नजर आने लगीं। मेट्रो स्टेशनों और हाईवे पर भी यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। बारिश के साथ तेज हवाओं से कई पेड़ गिर गए, जिससे जगह-जगह जाम लग गया। वहीं, बिजली आपूर्ति भी देर रात तक बाधित रही, जिससे लोगों को और परेशानियों का सामना करना पड़ा।
वाहनों का डूबना और जनजीवन अस्त-व्यस्त
कविनगर में तो हालात इतने खराब हो गए कि सड़कों पर खड़े वाहन तक पानी में डूब गए। कई लोग अपने वाहनों को पानी से बाहर निकालने के लिए घंटों मशक्कत करते नजर आए। जिन इलाकों को वीआईपी जोन माना जाता है, वहां तक जलभराव हो गया। इससे साफ है कि शहर की ड्रेनेज व्यवस्था भारी बारिश के सामने पूरी तरह फेल हो गई।
यमुना किनारे बाढ़ का खतरा
गाजियाबाद के लिए मुश्किलें सिर्फ बारिश तक सीमित नहीं हैं। हथनीकुंड बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने की वजह से गाजियाबाद और बागपत बॉर्डर के गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने लगी है। जिला प्रशासन ने यमुना नदी के किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी कर दिया है। ग्रामीणों को ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है ताकि किसी तरह की जानमाल की हानि न हो।
ADM गाजियाबाद सौरभ भट्ट लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों और सिंचाई विभाग की टीमों को मौके पर तैनात किया गया है। वहीं, एनडीआरएफ की टीमें भी अलर्ट मोड पर हैं ताकि आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
मंगलवार की बारिश ने एक बार फिर साफ कर दिया कि गाजियाबाद जैसे बड़े शहरों में भी जलभराव और निकासी की समस्या से निपटने के लिए ठोस इंतजाम नहीं हैं। थोड़ी सी तेज बारिश होते ही सड़कें तालाब में बदल जाती हैं और लोग घंटों जाम और पानी में फंसे रहते हैं।
फिलहाल प्रशासन का ध्यान हालात सामान्य करने पर है। जलभराव वाले इलाकों में पंप लगाकर पानी निकासी का काम जारी है। बिजली सप्लाई बहाल करने की कोशिशें भी तेजी से चल रही हैं। लेकिन लोगों के मन में सवाल यही है कि हर साल बारिश के मौसम में ऐसा क्यों होता है और कब तक उन्हें इन समस्याओं से जूझना पड़ेगा।
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