ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की है कि वे आने वाले एक साल तक सोना खरीदने से बचें और ईंधन सहित अन्य संसाधनों का सीमित और समझदारी से इस्तेमाल करें। पीएम मोदी ने लोगों को कार पूलिंग, वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लास जैसे विकल्प अपनाने की सलाह भी दी है। प्रधानमंत्री की यह अपील ऐसे समय में आई है जब मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका-ईरान के बीच हालात और ज्यादा गंभीर होते जा रहे हैं। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को चिंता में डाल दिया है।
आखिर क्यों करनी पड़ी यह अपील?
सरकार की चिंता के पीछे कई बड़े आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ी वजह डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की लगातार गिरती कीमत है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रुपया करीब 95 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया है, जिससे आयात महंगा होता जा रहा है।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल भी भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है। कुछ समय पहले तक जो कच्चा तेल 71 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह अब 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ता है।
फॉरेक्स रिजर्व पर बढ़ा दबाव
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व भी लगातार दबाव में बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह 700 अरब डॉलर के स्तर से नीचे चला गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल और सोने के आयात पर ज्यादा खर्च होने की वजह से डॉलर तेजी से बाहर जा रहे हैं। इससे सरकार पर डॉलर बचाने का दबाव बढ़ गया है। अगर स्थिति और खराब होती है तो इसका असर रुपये की कीमत, महंगाई और बाजार पर भी पड़ सकता है।
विदेशी निवेशक भी निकाल रहे पैसा
एक और बड़ी चिंता विदेशी निवेशकों का भारत से पैसा निकालना है। पिछले पांच महीनों में करीब 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश भारतीय बाजार से बाहर चला गया है। इससे शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर पड़ रहा है। निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण वैश्विक अस्थिरता और युद्ध जैसी स्थिति मानी जा रही है।
LPG और जरूरी आयात भी प्रभावित
युद्ध जैसे हालात का असर LPG और दूसरी जरूरी चीजों की सप्लाई पर भी पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध के बाद LPG आयात में करीब 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। अगर यह स्थिति लंबी चली तो आने वाले समय में गैस और ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
सरकार क्यों चाहती है कम खर्च?
भारत जब तेल, गैस, सोना या उर्वरक जैसी चीजें विदेशों से खरीदता है तो भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। ऐसे में अगर लोग कम सोना खरीदेंगे और ईंधन की खपत कम होगी तो डॉलर की बचत होगी। इससे फॉरेक्स रिजर्व पर दबाव कम पड़ेगा और देश की आर्थिक स्थिति को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। इसी वजह से सरकार लोगों को जरूरत के मुताबिक खर्च करने और अनावश्यक खर्च कम करने की सलाह दे रही है।
क्या आने वाले समय में बढ़ सकती है मुश्किल?
आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों को सबसे ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की अपील को एक एहतियाती कदम माना जा रहा है, ताकि देश भविष्य के बड़े आर्थिक झटकों से बच सके और आम जनता पर असर कम पड़े।
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