ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश के झांसी से एक ऐसा मामला सामने आया है जो उन लोगों की आंख खोलने के लिए काफी है, जो मानते हैं कि वंदे भारत जैसी ट्रेनें विकास की पहचान हैं, जो कि गलत नहीं है मगर क्या हो अगर उसी ट्रेन में VIP कल्चर का घिनौना चेहरा सामने आ जाए! सवाल तो बनता है कि क्या सचमुच हो रहा है सबका साथ, सबका विकास?
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, दिल्ली से भोपाल जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 20172) के एक्जीक्यूटिव कोच E-2 में एक यात्री, राज प्रकाश, सीट नंबर 49 पर यात्रा कर रहे थे।
उसी कोच में झांसी के BJP विधायक राजीव सिंह पारीछा अपनी पत्नी (सीट 50) और बेटे (सीट 51) के साथ थे। राजीव सिंह की खुद की सीट थी नंबर 8।
आरोप है कि विधायक ने यात्री से सीट एक्सचेंज करने को कहा, जिस पर यात्री ने इनकार कर दिया।
इसी बात पर विवाद बढ़ा और जैसे ही ट्रेन झांसी स्टेशन पर रुकी, करीब आधा दर्जन लोग डिब्बे में घुस आए और यात्री की पिटाई कर दी। पीड़ित लहूलुहान हो गया और ट्रेन आगे बढ़ गई।
मारपीट या बदतमीजी?
जहां पीड़ित और मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया कि विधायक के समर्थकों ने मारपीट की, वहीं विधायक राजीव सिंह पारीछा ने अपने बचाव में कहा कि सीटों पर बैठे लोग "अशोभनीय स्थिति" में थे, और उन्होंने केवल विनम्रता से बैठने का आग्रह किया था।
लेकिन क्या किसी ‘विनम्र आग्रह’ के बाद स्टेशन पर लोग घुसकर किसी को पीट सकते हैं?
कांग्रेस ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
पूर्व मंत्री रामनिवास रावत और पूर्व विधायक मुकेश नायक ने इस घटना को लेकर X (एक्स) पर तीखा हमला बोला।
“नाक से खून बह रहा था, मुंह से चीखें निकल रही थीं, लेकिन VIP का आदेश सर्वोपरि था। अगर वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेन में ये हो सकता है, तो सामान्य यात्रियों की सुरक्षा कहां है?”
एफआईआर दर्ज, लेकिन जांच अधूरी
विधायक और पीड़ित कि दोनों पक्षों की शिकायत पर झांसी GRP ने धारा 115(2) और 352 के तहत मामला दर्ज किया है।
लेकिन बड़ा सवाल ये भी है कि क्या CCTV, चश्मदीद और मेडिकल रिपोर्ट भी यही कहेंगे जो बयान कह रहे हैं?
वंदे भारत में VIP संस्कृति की 'असली तस्वीर'?
इस घटना ने सिर्फ एक यात्री को जख्मी नहीं किया, बल्कि आम आदमी की आवाज, गरिमा और हक को भी कुचला है। एक VIP की सीट नहीं मिली, तो हंगामा। आम आदमी ने मना किया, तो ‘सबक’ सिखाया गया।
सवाल यही है कि क्या वंदे भारत सिर्फ अमीरों, नेताओं और दबंगों की ट्रेन बनकर रह जाएगी?
बहरहाल, आप क्या सोचते हैं इस खबर को लेकर, अपनी राय हमें नीचे कमेंट्स में जरूर बताएँ।
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