ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
भारत भर में मकर संक्रांति का पवित्र पर्व 15 जनवरी 2026 को बड़े उत्साह और धार्मिक भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह त्यौहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण आरंभ होने का प्रतीक है, जो नई ऊर्जा, सकारात्मकता और समृद्धि का संदेश देता है।
श्रद्धालुओं का जनसैलाब – प्रयागराज से हरिद्वार तक
मकर संक्रांति पर देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों जैसे प्रयागराज (आस्था की नगरी), हरिद्वार और गंगासागर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। संगम तट पर लाखों भक्तों ने गंगा, यमुना और सरस्वती के मिलन स्थल पर पवित्र स्नान कर पुण्य अर्जित किया। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालु सुबह से ही आस्था की डुबकी लगा रहे हैं, जिनकी संख्या लाखों में है।
प्रयागराज के माघ मेले में मकर संक्रांति स्नान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। प्रशासन ने सुरक्षा, भंडारे, स्वास्थ्य शिविर और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किए हैं ताकि श्रद्धालुओं को सुविधाजनक और सुरक्षित अनुभव मिल सके।
त्योहार का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मकर संक्रांति और खिचड़ी पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं को शुभकामनाएँ दीं और इसे भारत की प्राचीन संस्कृति, सामाजिक एकता और धार्मिक विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व देश के विभिन्न हिस्सों में अलग‑अलग नामों और रीति‑रिवाज़ों के साथ मनाया जाता है — जैसे तमिलनाडु में पोंगल, असम में माघ बिहू, पंजाब में लोहड़ी, और गुजरात में उत्तरायण — जो हमारी सांस्कृतिक विविधता और एकता को सशक्त रूप से दर्शाता है।
मकर संक्रांति पर सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही जीवन में सकारात्मक बदलाव, आशा और समृद्धि की कामना की जाती है। इसे पुराने दिनों की कड़कती ठंड से उबरकर ऊष्मा और उजाले की ओर बढ़ने का संकेत माना जाता है।
खिचड़ी और परंपराएं
उत्तर भारत में इस दिन खिचड़ी बनाना और उसे वितरित करना एक विशेष परंपरा है। खिचड़ी सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि समुदाय की सहभागिता, समृद्धि और स्वास्थ्य का प्रतीक भी है। यह परंपरा भोजन और आस्था के बीच एक अनूठा संतुलन बनाती है, जिसमें परिवार और समाज के सभी वर्ग एक साथ शामिल होते हैं। खिचड़ी के अलावा तिल‑गुड़ की मिठाइयाँ और अन्य पारंपरिक व्यंजन भी बनाये जाते हैं, जो इस त्योहार की खुशियों को बढ़ाते हैं और रिश्तों में मिठास घोलते हैं।
छुट्टि और आयोजन
उत्तर प्रदेश सरकार ने 15 जनवरी 2026 को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है, ताकि लोग प्रौढ़ता से मकर संक्रांति और उसके संबंधित धार्मिक कृत्यों को पूरा कर सकें। इस दिन सभी सरकारी विभाग, बैंकों और शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश रहेगा।
देशभर में पर्व की धूम
मकर संक्रांति का उत्सव केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है। भारत के विभिन्न भागों में इसे अलग‑अलग रूपों में मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कई अन्य नेताओं ने भी देशवासियों को इस पर्व की शुभकामनाएं दी हैं, जिसमें लोगों में उत्साह, समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई है।
उत्सव का सार
मकर संक्रांति 2026 ने आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता को एक ही धागे में पिरोया है। चाहे वह संगम में स्नान कर रहे श्रद्धालु हों, गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी अर्पित करने वाले भक्त हों, या परिवार‑परिवार में तिल‑गुड़ की मिठाइयाँ बांटते लोग — यह त्योहार हर दिल में उमंग, जोश और सकारात्मकता भर रहा है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!