ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
हर साल 26 जनवरी को भारत अपना गणतंत्र दिवस भव्य परेड के साथ मनाता है। यह दिन हमें हमारे संविधान, एकता, और विविधता की ताकत याद दिलाता है। इस वर्ष 2026 के गणतंत्र दिवस परेड में 30 झांकियाँ (tableaux) शामिल होंगी, जो भारत की विविधता, सांस्कृतिक विरासत, सैन्य शक्ति और विकास की गाथा को दर्शाएँगी। इनमें से कुछ झांकियाँ इतिहास, संस्कृति, आत्मनिर्भरता, और आधुनिक उपलब्धियों को रंगीन रूप से प्रदर्शित करेंगी, जो देखने वालों के दिलों में गर्व भर देंगी।
परंपरा के अनुसार, इन झांकियों को कर्तव्य पथ, नई दिल्ली में राज्य सरकारों, केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। इस बार 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों के साथ-साथ 13 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की झांकियाँ भी शामिल हैं।
मुख्य थीम: ‘वंदे मातरम्’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’
इस वर्ष परेड की झांकियाँ दो मुख्य थीम पर आधारित हैं — ‘वंदे मातरम्’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’। ‘वंदे मातरम्’ थीम भारत की स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाती है, जिसमें देशभक्ति और बलिदान की भावनाएँ समाहित हैं। वहीं ‘आत्मनिर्भर भारत’ थीम विकास, स्वावलंबन और आधुनिक भारत की तकनीकी उन्नति को दर्शाती है।
इन थीमों के माध्यम से झांकियों में इतिहास से लेकर आज के भारत के विकास की यात्रा को दिखाया जाएगा — कृषि से उद्योग, शिक्षा से तकनीकी उन्नति तक, सभी क्षेत्रों में देश की प्रगति को शामिल किया गया है।
Operation Sindoor झांकी: परेड का केंद्र आकर्षण
सबसे खास और चर्चा में रहने वाली झांकी इस साल ‘Operation Sindoor’ है। यह झांकी भारत की सैन्य ताकत और विजय का प्रतीक है। इसमें भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना की साझा शक्ति को दर्शाया गया है। राफेल, सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों से लेकर ब्रह्मोस मिसाइल तक, सभी सैन्य उपकरणों के दृश्य इस झांकी में दिखाई देंगे, जो भारत की सुरक्षा क्षमता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
Operation Sindoor झांकी यह बताती है कि हमारी सेनाओं ने कठिन परिस्थितियों में भी एक साथ मिलकर किस प्रकार की उपलब्धियाँ हासिल की हैं और आने वाले समय में किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार हैं। यह झांकी देश की सैन्य क्षमता और एकता का गर्वमयी संदेश देती है।
राज्यों की झांकियों में विविधता और संस्कृति
गणतंत्र दिवस परेड में सभी राज्यों की झांकियाँ भी अपनी-अपनी पहचान और संस्कृति को दर्शाएँगी। हर झांकी एक अलग कहानी कहेगी — जैसे गुजरात की झांकी 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से आज़ाद भारत तक के झंडों के इतिहास को दिखाएगी, जबकि झारखंड की झांकी उसके प्राकृतिक सौंदर्य, पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाएगी।
कई राज्यों की झांकियों में स्थानीय परंपरा, कला, और अवसरों का भी सुंदर समन्वय देखने को मिलेगा। यह झांकियाँ बरसों से चली आ रही विविधताओं को एक झलक में दिखाती हैं — चाहे वह ऐतिहासिक कहानी हो या क्षेत्रीय उपलब्धियाँ।
केंद्र सरकार की विशेष झांकियाँ
केंद्र सरकार के भी कई विभाग अपनी झांकियाँ पेश करेंगे, जिनमें से कुछ में देश की शिक्षा प्रणाली, तकनीकी विकास, स्वास्थ्य और कृषि की कहानी को दर्शाया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर:
सांस्कृतिक प्रदर्शन और कलाकारों की भूमिका
इतना ही नहीं, परेड में झांकियों के साथ सैकड़ों कलाकार भी रंगीन परंपरागत और आधुनिक प्रस्तुतियाँ देंगे। इन कलाकारों में लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और संगीत के जरिये भारत की विविध संस्कृति को दिखाया जाएगा। ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम परेड को और भी जीवंत और उत्साहपूर्ण बनाते हैं।
कलाकारों की मेहनत, आत्मीयता और प्रदर्शन दर्शकों को भारत की कला, संस्कृति और भावना से रूबरू कराएंगे। केवल झांकियाँ ही नहीं, बल्कि यह सांस्कृतिक प्रदर्शन भी परेड की शोभा बढ़ाता है और देशभक्ति के भाव को गहरा करता है।
मुख्य अतिथि और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में कई अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की उपस्थिति भी सामने आएगी। फ्रांस, यूरोपीय आयोग जैसे कई देशों के प्रमुख नेताओं को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया है, जिससे यह उत्सव और भी विशेष बन गया है।
यह दर्शाता है कि भारत न केवल अपनी संस्कृति को गर्व से पेश कर रहा है बल्कि दुनिया के सामने अपने नेतृत्व, विकास, और सामरिक शक्ति को भी प्रमाणित कर रहा है। यह सब भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को और मजबूती देता है।
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