ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक विशेष पाती लिखकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है। इस पत्र में उन्होंने लोगों से प्रकृति, जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण ही विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। हमें पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा।
सनातन संस्कृति में प्रकृति का विशेष महत्व
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पत्र में बताया कि भारतीय सनातन संस्कृति में वृक्षों, नदियों, पहाड़ों और जीव-जंतुओं की पूजा की परंपरा सदियों पुरानी है। वेदों में प्रकृति की आराधना को ईश्वर की उपासना के समान माना गया है। अग्नि, वायु, जल और पृथ्वी को देव स्वरूप मानकर उनकी रक्षा और सम्मान का संदेश दिया गया है।
उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देती है। यही कारण है कि भारत में अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं प्रकृति से जुड़ी हुई हैं।
जल, वन और भूमि का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी
सीएम योगी ने सनातन परंपरा में वर्णित देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण का उल्लेख करते हुए कहा कि देव ऋण का सीधा संबंध प्रकृति से है। जल, वन, भूमि और संपूर्ण सृष्टि की रक्षा करके ही हम इस ऋण से उऋण हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में जल संरक्षण, वृक्षारोपण और नदियों के पुनर्जीवन का संकल्प पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। "जल है तो हम हैं" केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। यदि जल और पर्यावरण सुरक्षित रहेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित होगा।
पर्यावरण संरक्षण में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियां
मुख्यमंत्री ने बताया कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश में रामसर स्थलों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है। हाल ही में शेखा झील पक्षी अभयारण्य को भी इस सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि जब समाज और सरकार मिलकर काम करते हैं, तब प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में बड़े बदलाव संभव होते हैं। उत्तर प्रदेश इसका एक अच्छा उदाहरण बनकर सामने आया है।
युवाओं और बच्चों से विशेष अपील
सीएम योगी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे जल संरक्षण, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण और नदियों की रक्षा जैसे कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और सहभागिता ही हरित और समृद्ध उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत है। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों से भी एक खास अपील की। उन्होंने कहा कि हर बच्चा अपने जन्मदिन या किसी विशेष अवसर पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी नियमित देखभाल भी करे। इससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ेगी।
प्रकृति संरक्षण का लें सामूहिक संकल्प
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश के अंत में प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रकृति संरक्षण, जल स्रोतों के संवर्धन और वृक्षों की रक्षा का सामूहिक संकल्प लें। उन्होंने कहा कि स्वच्छ और हरित पर्यावरण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। यदि हम सभी मिलकर प्रयास करें तो आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर और सुरक्षित पर्यावरण दे सकते हैं।
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