ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। सबसे ज्यादा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जिसके कारण कई देशों में पेट्रोल और डीजल महंगे हो रहे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। पिछले कुछ दिनों में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिससे आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मई 2026 में भारत के कई शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल करीब 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। हालांकि फिलहाल भारत की स्थिति पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से बेहतर मानी जा रही है।
क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
दुनिया के कई बड़े तेल उत्पादक देश पश्चिम एशिया में स्थित हैं। ईरान और आसपास के इलाकों में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है तो उसका सीधा असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है।
भारत के पास फिलहाल पर्याप्त स्टॉक
राहत की बात यह है कि भारत के पास फिलहाल पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। सरकार पहले से ऐसे हालात के लिए रणनीतिक तेल भंडारण तैयार रखती है ताकि सप्लाई प्रभावित न हो। इसी वजह से अभी देश में पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें या ईंधन की भारी कमी जैसी स्थिति देखने को नहीं मिल रही है। सरकार लगातार सप्लाई चेन पर नजर बनाए हुए है और तेल कंपनियां भी हालात को संभालने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर युद्ध और तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।
पाकिस्तान और बांग्लादेश में ज्यादा खराब हालात
अगर पड़ोसी देशों की बात करें तो वहां स्थिति ज्यादा गंभीर नजर आ रही है। पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में करीब 43 प्रतिशत और डीजल में लगभग 55 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में पेट्रोल करीब 414 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल 432 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुका है।
वहीं बांग्लादेश में भी फ्यूल संकट देखने को मिला है। वहां सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ी। बांग्लादेश में पेट्रोल लगभग 135 से 140 टका प्रति लीटर और डीजल करीब 124 से 128 टका प्रति लीटर बिक रहा है। भारत ने बांग्लादेश को डीजल सप्लाई करके उसकी मदद भी की थी ताकि वहां फ्यूल संकट को कुछ हद तक कम किया जा सके।
आम आदमी की जेब पर बढ़ेगा बोझ
पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ जाता है, जिसका असर रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर भी दिखाई देता है। सब्जियां, दूध, राशन, फल और अन्य जरूरी सामान की कीमतें धीरे-धीरे बढ़ने लगती हैं। ऐसे में आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
सरकार हालात पर रख रही नजर
सरकार और तेल कंपनियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने जैसी स्थिति नहीं है क्योंकि भारत के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। लेकिन इस संकट ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि दुनिया के किसी भी हिस्से में होने वाला युद्ध या तनाव सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब को प्रभावित कर सकता है।
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