ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
कल्याण‑डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) में एक राजनीतिक घटना ने अचानक महाराष्ट्र की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के पांच पार्षदों ने शिवसेना (शिंदे गुट) को खुलकर समर्थन देने का फैसला किया है, जिससे स्थानीय राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। यह समर्थन खासकर विकास और शहर की बेहतर सुविधाओं के लिये लिया गया निर्णय बताया जा रहा है, लेकिन इसी के कारण मनसे प्रमुख राज ठाकरे नाराज हो गए हैं। इससे पार्टी के भीतर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जो अब पूरे महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का विषय बन चुका है।
कल्याण‑डोंबिवली में कौन सा राजनीतिक परिदृश्य है?
कल्याण‑डोंबिवली में नगर निगम के चुनाव परिणाम के बाद सत्ता की कहानी कुछ इस तरह बनी:
इस समीकरण में मनसे के समर्थन से शिंदे गुट तथा उनके साथी दलों को कुल ताकत बढ़कर 58 पार्षदों तक पहुंच गई है, जिससे महापौर पद के लिए स्थिति और स्पष्ट होती दिख रही है।
मनसे का समर्थन: विकास और जनता की सेवा को बताया कारण
मनसे के स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह समर्थन केवल सत्ता हासिल करने के लिए नहीं दिया गया, बल्कि कल्याण‑डोंबिवली के विकास और फंड मिलने में आसानी के लिये है। मनसे के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक राजू पाटिल ने बताया कि शक्ति के भीतर शामिल रहकर ही वे शहर के विकास कार्यों को आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनता की भलाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राजू पाटिल ने स्पष्ट किया कि शहर भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है, जिससे कई योजनाओं को पूरा करना मुश्किल हो रहा था। इसलिए उन्होंने माना कि सत्ता के समीकरण में शामिल होकर ही निगम को पर्याप्त निधि दिलाई जा सकती है।
इस कदम को मनसे ने स्थिरता और विकास‑केंद्रित राजनीति की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है, जिससे निगम में प्रशासनिक निर्णय बेहतर तरीके से लिए जा सकते हैं।
राज ठाकरे की नाराजगी और प्रतिक्रिया
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने इस फैसले पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा है कि स्थानीय पार्षदों का यह निर्णय उन्हें परेशान करता है और इस तरह से पार्टी के खिलाफ काम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। हालांकि राज ठाकरे ने सीधे तौर पर अपने शब्दों में पार्टी से बगावत का आरोप नहीं लगाया, लेकिन संकेत दे दिया कि पार्टी लाइन के खिलाफ फैसले लेने वालों के खिलाफ कदम उठाया जाएगा
कुछ सियासी विश्लेषकों का मानना है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच गठबंधन पहले एकजुटता की मिसाल माना जा रहा था, लेकिन स्थानीय स्तर पर हुए इस फैसले ने ठाकरे परिवार के समीकरणों में दरार होने की बात भी उजागर कर दी है।
शिंदे शिवसेना का दलित आंकड़ा और गठबंधन
शिंदे गुट की शिवसेना ने नगर निगम में सत्ता बनाने के लिए मनसे के समर्थन को एक रणनीतिक कदम बताया है। श्रीकांत शिंदे समेत शिंदे गुट के नेताओं ने कहा है कि यह समर्थन नगर में स्थिरता लाने और विकास कार्यों को जारी रखने के लिये अहम है। उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ मिलकर भी यह गठबंधन नगर के विकास के लिए बेहतर निर्णय ले सकता है।
शिंदे गुट की शिवसेना ने स्पष्ट किया कि मनसे द्वारा दिया गया समर्थन केवल पार्टियों के बीच गठबंधन का संकेत नहीं है, बल्कि नगर के हित में लिया गया फैसला है। उन्होंने कहा कि अगर सब मिलकर काम करेंगे, तो निगम में प्रशासन सुचारू रूप से चल सकेगा और जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकती हैं।
उद्धव ठाकरे गुट की प्रतिक्रिया
उद्धव ठाकरे गुट ने इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे “गद्दारी” बताया है। शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राऊत ने कहा कि जो लोग महाराष्ट्र और बाला साहेब ठाकरे के विचारों के खिलाफ हैं, उन्हें राजनीति में जगह नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने मनसे के इस कदम को गहरी चिंता बताई है और कहा है कि यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक अशांति का संकेत है।
संजय राऊत ने कहा कि मनसे के इस कदम से ठाकरे परिवार के बीच पहले से जारी दूरी और भी गहरी हो सकती है और इससे आगामी चुनावों में भी अलग तरह की राजनीतिक लड़ाइयां देखने को मिल सकती हैं।
क्या यह निर्णय भाजपा के लिये चुनौती है?
राजकीय समीकरणों के हिसाब से, भाजपा को भी इस गठबंधन से चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा ने नगर निगम में 50 सीटें जीती थीं और परंपरागत रूप से इसका साथ शिंदे गुट को भी मिला हुआ था। लेकिन मनसे के पाँच पार्षदों के समर्थन से शिंदे गुट का समीकरण मजबूत हुआ है, जिससे भाजपा की स्थिति थोड़ी कमजोर दिख रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मनसे के पाँच पार्षद शिंदे गुट के साथ रहें और ठाकरे गुट अलग‑थलग पड़ा रहे, तो भाजपा को निगम में अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
इसका असर महाराष्ट्र राजनीति पर
इस घटना से महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ स्पष्ट संकेत मिले हैं — पहला, छोटे दल भी बड़े निर्णयों में भूमिका निभा सकते हैं, और दूसरा, गठबंधन हमेशा स्थिर नहीं रहता। भविष्य में विधानसभा चुनावों और नगर निकायों के परिणामों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
राज ठाकरे की मनसे का यह समर्थन शिंदे‑भाजपा महायुति के भीतर संतुलन बदलने वाला है, जिससे उद्धव ठाकरे के शिवसेना (UBT) गुट को नुकसान हो सकता है।
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