ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। राज्य के करीब 30 कांग्रेस विधायकों ने नई दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात कर कैबिनेट फेरबदल की मांग रखी है। इन विधायकों का कहना है कि उनकी मांग केवल मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर है, न कि नेतृत्व परिवर्तन को लेकर। यानी वे मुख्यमंत्री के पद पर कोई सवाल नहीं उठा रहे, बल्कि सरकार में अधिक प्रतिनिधित्व चाहते हैं।
विधायकों की क्या है मांग?
मुलाकात के बाद वरिष्ठ विधायक अशोक पट्टन ने बताया कि उनका मुख्य मुद्दा कैबिनेट फेरबदल है। उन्होंने कहा कि वे किसी अन्य राजनीतिक विषय पर चर्चा नहीं करना चाहते। पट्टन ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि कौन मंत्री बनता है, लेकिन वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को भी सरकार में शामिल किया जाना चाहिए।
इस प्रतिनिधिमंडल में कई अनुभवी नेता शामिल थे, जिनमें एस.एन. नारायणस्वामी, के. षडाक्षरी, ए.आर. कृष्णमूर्ति, पुत्तरंगा शेट्टी और बेलूर गोपाल कृष्ण जैसे नाम प्रमुख हैं। ये सभी कई बार चुनाव जीत चुके हैं और पार्टी में मजबूत पकड़ रखते हैं।
क्यों उठी फेरबदल की मांग?
कई विधायकों का मानना है कि लंबे समय से कैबिनेट में बदलाव नहीं हुआ है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है। उनका कहना है कि अब सही समय है जब ज्यादा से ज्यादा नेताओं को सरकार में मौका दिया जाए। विधायकों ने साफ तौर पर कहा कि यह सिर्फ एक मुद्दे को लेकर किया गया प्रयास है—कैबिनेट फेरबदल। वे चाहते हैं कि पार्टी आलाकमान इस पर गंभीरता से विचार करे।
क्या बदल सकता है कैबिनेट?
सूत्रों के मुताबिक, अगर पार्टी नेतृत्व इस मांग को मान लेता है, तो कर्नाटक कैबिनेट में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य में मुख्यमंत्री समेत कुल 34 मंत्री हो सकते हैं। फिलहाल दो पद खाली हैं, क्योंकि हाल ही में एक मंत्री का इस्तीफा हुआ है और एक को बर्खास्त किया गया है।
ऐसे में संभावना है कि इन खाली पदों को भरने के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी मौका दिया जाए। यह कदम न सिर्फ असंतुष्ट विधायकों को संतुष्ट कर सकता है, बल्कि सरकार की स्थिरता को भी मजबूत कर सकता है।
राजनीतिक संकेत क्या हैं?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर कैबिनेट फेरबदल होता है, तो यह मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व में स्थिरता का संकेत होगा। इससे यह भी संदेश जाएगा कि सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। साथ ही, यह बदलाव आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी के अंदर संतुलन बनाने का प्रयास भी हो सकता है।
कुल मिलाकर, कर्नाटक कांग्रेस में कैबिनेट फेरबदल की मांग ने सियासी माहौल को गर्मा दिया है। अब सबकी नजर पार्टी आलाकमान के फैसले पर टिकी है।अगर यह फेरबदल होता है, तो इसका असर न सिर्फ सरकार के अंदर बल्कि पूरे राज्य की राजनीति पर देखने को मिल सकता है।
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