ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान ने देश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। चेन्नई में दिए गए अपने भाषण में खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक विवादित टिप्पणी की, जिसके बाद बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और मामले को चुनाव आयोग तक पहुंचा दिया।
बीजेपी ने चुनाव आयोग में की शिकायत
इस मामले में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि बीजेपी ने खरगे के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि खरगे का बयान न केवल अपमानजनक है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला भी है। बीजेपी का कहना है कि इस तरह के बयान आचार संहिता का उल्लंघन करते हैं और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
क्या था खरगे का बयान?
दरअसल, चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने AIADMK और बीजेपी के गठबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “वे मोदी के साथ कैसे जुड़ सकते हैं? वो एक आतंकवादी हैं।” इसी बयान ने पूरे विवाद को जन्म दिया। खरगे ने आगे कहा कि बीजेपी समानता और न्याय में विश्वास नहीं करती और उनके साथ जुड़ना लोकतंत्र को कमजोर करता है।
बीजेपी नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
खरगे के बयान पर बीजेपी नेताओं ने कड़ी नाराजगी जताई। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह बयान बेहद शर्मनाक है और इससे देश के प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का अपमान हुआ है। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों से इस बयान के लिए माफी मांगने की मांग भी की।
खरगे की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी सफाई भी पेश की। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। उनका कहना था कि उन्होंने प्रधानमंत्री को आतंकवादी नहीं कहा, बल्कि यह कहा कि सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करके लोगों में डर पैदा कर रही है। खरगे ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है, और इसी संदर्भ में उन्होंने अपनी बात रखी थी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में बयानबाजी के स्तर और उसकी सीमाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक तरफ बीजेपी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे गलतफहमी और बयान के गलत अर्थ निकालने का मामला बता रही है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की कार्रवाई और इस विवाद का राजनीतिक असर देखने लायक होगा
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