ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
पंजाब कांग्रेस इन दिनों राजनीतिक उथल‑पुथल के बीच घिरी हुई है। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले ही पार्टी के अंदर जातिगत राजनीति और गुटबाजी के आरोप लगने लगे हैं, जिसका असर संगठन के भीतर दिख रहा है। इसको लेकर आज दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान ने एक अहम बैठक बुलाई है, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं को बुलाया गया है ताकि विवाद को सुलझाया जा सके और चुनावी रणनीति तय हो सके।
पार्टियों के अंदर का यह विवाद पार्टी की एकता और रणनीति दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है। पंजाब कांग्रेस के सीनियर नेताओं सहित मुख्य रूप से अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, विपक्ष के नेता धीर प्रताप सिंह बाजवा, विजय इंदर सिंगला और अंबिका सोनी इस बैठक में हिस्सा लेंगे। कांग्रेस हाईकमान के इंचार्ज भूपेश बघेल भी बैठक में मौजूद रहेंगे।
जातिगत विवाद और चन्नी का बयान
पंजाब कांग्रेस में यह सारा विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने दलित समुदाय के लिए पार्टी के नेतृत्व में प्रतिनिधित्व की कमी पर सवाल उठाए। उन्होंने एक वीडियो में कहा कि दलितों को राजनीतिक पदों पर पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा है और पार्टी के शीर्ष पदों पर उन लोगों का दखल कम है जिनका दलित समुदाय में समर्थन है।
चन्नी ने यह भी कहा कि अगर पार्टी मानती है कि पंजाब में लगभग 32 प्रतिशत आबादी दलितों की है, तो उन्हें नेतृत्व और निर्णय‑निर्माण की प्रक्रिया में बराबर स्थान क्यों नहीं दिया जाता। उनके इस बयान ने पार्टी में जातिगत राजनीति का आरोप जन्म दे दिया है और कई नेताओं के बीच मतभेद उभरे हैं।
राजा वड़िंग और चन्नी के बीच मतभेद
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने चन्नी के बयान पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि कांग्रेस किसी भी तरह की विभाजनकारी राजनीति में यकीन नहीं रखती। उन्होंने पार्टी के भीतर एकता बनाए रखने और जातिगत मुद्दों को विकेंद्रित करने के लिए नेताओं से संयम और समझदारी से काम लेने का आग्रह किया है।
राजा वड़िंग ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी यह संदेश दिया है कि 2027 के चुनाव के लिए कांग्रेस को एक सशक्त और एकजुट मंच तैयार करना चाहिए, जिससे जनता में सकारात्मक संदेश जाएगा। हालांकि बहस और मतभेद खुले तौर पर सामने आने के कारण पार्टी की छवि को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
हाईकमान की बैठक: क्या है एजेंडा?
आज दोपहर 3 बजे दिल्ली के इंदिरा हॉल में होने वाली इस बैठक को कांग्रेस हाईकमान की तरफ से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक का मुख्य एजेंडा है:
1. विवाद का हल निकालना
जातिगत टिप्पणी और उससे जुड़े आरोप‑प्रत्यारोप को सुलझाना और पार्टी के अंदर एकता बनाए रखना।
2. चुनाव रणनीति तैयार करना
2027 विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा, आगामी चुनावों में कांग्रेस की भूमिका और संभावित उम्मीदवारों पर सहमति बनाना।
3. जातिगत भावना को संबोधित करना
पार्टी के भीतर विभिन्न समुदायों को समान रूप से प्रतिनिधित्व देने के लिए उचित योजना बनाना और विवाद से उत्पन्न तनाव को कम करना।
पार्टी के भीतर यह बैठक यह तय करेगी कि कांग्रेस किस दिशा में आगे बढ़ेगी और कैसे यह मतभेद सुलझाकर चुनावी मोर्चे पर मजबूत होकर उतरेगी।
भीतरु गुटबाजी और पार्टी की चिंता
पंजाब कांग्रेस के भीतर यह गुटबाजी कोई नया मामला नहीं है। पिछले कुछ महीनों में कई नेता अपनी बात खुलकर रख रहे थे और अंदरुनी मतभेद सार्वजनिक होते चले गए हैं। इससे पार्टी की एकता पर सवाल उठ रहे हैं और ऐसे समय में जब पंजाब में पंचायत चुनाव और जिला परिषद चुनाव भी हो रहे हैं, कांग्रेस के लिए यह माहौल परेशानी का संकेत भी बन सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि चुनाव के ठीक पहले पार्टी के अंदरूनी मतभेद होने से विपक्षी दलों को फायदा हो सकता है, जिससे आम आदमी पार्टी (AAP) और बीजेपी समेत अन्य दल अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं।
चन्नी की भूमिका और समर्थन
चन्नी का कहना है कि उन्होंने दलित समुदाय और अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए आवाज उठाई है। हालांकि उन्होंने किसी विशेष समुदाय के खिलाफ टिप्पणी करने से इनकार किया है, लेकिन उनके बयान के वायरल होने के बाद विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है।
उनके समर्थकों का कहना है कि चन्नी की बात सिर्फ सामाजिक न्याय और समान प्रतिनिधित्व की थी, लेकिन विपक्षी गुट इसे एक राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इससे पार्टी के भीतर भावना तनाव बना हुआ है, जिसे बैठक के जरिए सुलझाना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
भूपेश बघेल और दिल्ली की भूमिका
कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल भी इस बैठक में मौजूद रहेंगे और पार्टी की स्थिति को समझने और सुधारने की दिशा में राय देंगे। भूपेश बघेल ने पहले भी नेताओं से संयम रखने का आग्रह किया है और कहा है कि पंजाब कांग्रेस को अपना संगठन मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि व्यक्तिगत मतभेदों को बढ़ावा देने पर।
दिल्ली हाईकमान का यह कदम यह दर्शाता है कि पार्टी शीर्ष नेतृत्व इस विवाद को हल करने और पंजाब में कांग्रेस के प्रभाव को बढ़ाने के लिए सजग है।
2027 विधानसभा चुनाव: चुनौती और अवसर
2027 के विधानसभा चुनाव पंजाब कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। पार्टी को पिछले कुछ वर्षों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, और किसानों की समस्याओं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर जनता के बीच अपनी उपस्थिति मजबूत करनी है। पंचायत चुनावों में जीत का असर भी 2027 के चुनाव पर पड़ेगा।
सियासी माहौल में जातिगत विवाद जैसे मुद्दे पार्टी की साख पर असर डाल सकते हैं यदि इन्हें समय रहते सुलझाया न गया। इसीलिए सहमति, संगठन की मजबूती और रणनीति का स्पष्ट होना जरूरी है।
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